डिजिटल अरेस्ट: Digital Arrest क्या है और इससे कैसे बचें?

डिजिटल अरेस्ट

आजकल ऑनलाइन फ्रॉड किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगते। स्कैमर्स हर दिन नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं, और अफ़सोस की बात ये है कि अच्छे-खासे समझदार लोग भी इनके जाल में फँसकर लाखों रुपये गंवा बैठते हैं।

अब ठग सिर्फ़ लॉटरी या फेक कॉल तक सीमित नहीं रहे। उनका नया हथियार है, डर और तकनीक का खतरनाक कॉम्बिनेशन। इसी का एक ताज़ा उदाहरण है “डिजिटल अरेस्ट स्कैम”

इस स्कैम में ठग खुद को CBI, पुलिस या किसी बड़ी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर आपको वीडियो कॉल करते हैं। यूनिफॉर्म, सख़्त लहजा और गंभीर माहौल, सब कुछ इतना असली लगता है कि सामने वाला घबरा जाता है। फिर कहा जाता है,

“आप पर गंभीर अपराध का केस है… और अब आपको डिजिटल तरीके से गिरफ्तार किया जाएगा।”

हाल ही में भारत के कई शहरों में लोग इस स्कैम का शिकार हो चुके हैं। डर, हड़बड़ी और शक की गुंजाइश न छोड़ने वाली बातें, यही इन ठगों का असली खेल है।

इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे:

  • आखिर डिजिटल अरेस्ट स्कैम है क्या,
  • स्कैमर्स लोगों को कैसे अपने जाल में फंसाते हैं, और
  • सबसे ज़रूरी बात, आप खुद को और अपने पैसे को इससे कैसे बचा सकते हैं।

डिजिटल अरेस्ट क्या है?

डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक बेहद खतरनाक ऑनलाइन धोखाधड़ी है।

इसमें स्कैमर्स पीड़ित को यकीन दिला देते हैं कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय अपराध में हिस्सा लिया है। 

फिर वीडियो कॉल पर खुद को CBI, पुलिस या विदेशी एजेंसी का अधिकारी बताकर डर का ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला सोचने की बजाय डर के मारे गलती कर बैठता है।

याद रखिए, डर ही इन स्कैमर्स की सबसे बड़ी ताकत है। 

लेकिन सही जानकारी आपको उनसे एक कदम आगे रख सकती है।

डिजिटल अरेस्ट कैसे होता है?

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग बेहद सोची-समझी चाल चलते हैं ताकि पीड़ित डर और घबराहट में जल्दी से पैसे ट्रांसफर कर दे।

यह पूरा प्लान चार मुख्य स्टेप्स में चलता है:

1. WhatsApp या Skype वीडियो कॉल

स्कैमर सबसे पहले WhatsApp, Skype या अन्य वीडियो कॉलिंग ऐप्स पर संपर्क करते हैं।

  • कॉल के दौरान वे पुलिस या CBI की यूनिफॉर्म पहनते हैं या नकली ऑफिस का बैकग्राउंड लगाते हैं ताकि कॉल बिल्कुल असली लगे।
  • अक्सर यह बैकग्राउंड किसी CBI दफ्तर, पुलिस कंट्रोल रूम या इंटरपोल हेडक्वार्टर जैसा होता है।
  • कॉल का उद्देश्य होता है कि पीड़ित डर जाए और बिना ज्यादा सोचे-समझे स्कैमर की बातें माने।

2. नकली वारंट और दस्तावेज दिखाना

इसके बाद स्कैमर फर्जी कागजात और ID कार्ड दिखाते हैं

  • वे कहते हैं कि आप पर मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या किसी गंभीर अपराध का आरोप है।
  • कॉल के दौरान arrest warrant, summons या केस फाइल स्क्रीन पर दिखाते हैं।
  • ये दस्तावेज पहली नजर में असली लगते हैं, क्योंकि इनमें सरकारी लोगो, मुहर और केस नंबर दिए जाते हैं।
  • लेकिन असलियत में ये सब फर्जी होते हैं और पीड़ित को डराने का एक तरीका मात्र होते हैं।

3. धमकियां और दबाव बनाना

जब पीड़ित घबरा जाता है तो स्कैमर सख्त भाषा और धमकियों का सहारा लेते हैं

  • वे कहते हैं कि अगर आपने तुरंत सहयोग नहीं किया तो डिजिटल तरीके से गिरफ्तारी कर ली जाएगी।
  • कई बार यह भी कहा जाता है कि आपके बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए जाएंगे, या पासपोर्ट जब्त हो जाएगा।
  • यह दबाव इतना ज्यादा होता है कि पीड़ित सवाल पूछने की हिम्मत ही नहीं कर पाता और स्कैमर के निर्देशों का पालन करने लगता है।

4. पैसे ट्रांसफर कराने की चाल

अंत में स्कैमर का मुख्य मकसद पीड़ित से पैसे निकलवाना होता है।

  • वे कहते हैं कि आपको तुरंत “penalty”, “fine” या “refundable security deposit” जमा करना होगा।
  • इसके लिए वे UPI ID, QR Code या बैंक अकाउंट डिटेल भेजते हैं।
  • डर के माहौल में पीड़ित बिना सोचे-समझे पैसे ट्रांसफर कर देता है।
  • कुछ स्कैमर्स कई किश्तों में पैसा मंगवाते हैं और तब तक दबाव बनाए रखते हैं जब तक पीड़ित के खाते खाली न हो जाएं।

इस तरह स्कैमर डर, शर्म और कानूनी झंझट का डर दिखाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया बहुत तेजी से होती है ताकि पीड़ित के पास सोचने का समय न रहे।

डिजिटल अरेस्ट के केस

आये दिन डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) साइबर फ्रॉड के कई मामले सामने आते है। 

हाल ही में सामने आए दो बड़े मामलों से यह साफ हो गया है कि यह स्कैम कितना संगठित और खतरनाक हो चुका है।

केस 1: दिल्ली में डॉक्टर दंपति से करोड़ों की ठगी

दिल्ली में सामने आए एक बड़े डिजिटल अरेस्ट मामले में साइबर अपराधियों ने एक बुजुर्ग डॉक्टर दंपति को निशाना बनाया।

क्या हुआ?

  • ठगों ने खुद को सरकारी एजेंसी के अधिकारी बताकर दंपति से संपर्क किया।
  • उन्हें बताया गया कि उनका नाम किसी गंभीर वित्तीय अपराध या मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ा हुआ है।
  • डर और कानूनी कार्रवाई के दबाव में दंपति को “डिजिटल अरेस्ट” जैसी स्थिति में रखा गया।
  • उन्हें लगातार निगरानी में रहने का अहसास कराया गया और बैंक से जुड़े निर्देश दिए गए।

कितना नुकसान हुआ?

  • कुल करीब 14.85 करोड़ रुपये उनसे ट्रांसफर करवा लिए गए।
  • दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में करीब 1.9 करोड़ रुपये फ्रीज कर लिए गए।
  • जांच में पता चला कि रकम को घुमाने के लिए 700 से ज्यादा म्यूल बैंक अकाउंट इस्तेमाल किए गए थे, जो एक बड़े साइबर नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।

केस 2: सीनियर सिटीजन दंपति को व्हाट्सएप कॉल से बनाया निशाना

एक अन्य मामले में साइबर ठगों ने सीनियर सिटीजन दंपति को व्हाट्सएप के जरिए संपर्क किया और खुद को बैंक या जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताया।

स्कैम कैसे शुरू हुआ?

  • पहले कॉल में उन्हें बताया गया कि उनके बैंक खाते या पहचान का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हुआ है।
  • इसके बाद वीडियो कॉल या लगातार संपर्क करके उन्हें विश्वास दिलाया गया कि वे जांच के दायरे में हैं।
  • डर का माहौल बनाकर उनसे बैंक डिटेल और पैसे ट्रांसफर करवाए गए।

पुलिस जांच में क्या सामने आया?

  • मामले की जांच के दौरान कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई।
  • कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिससे पता चलता है कि ऐसे फ्रॉड में कभी-कभी अंदरूनी मदद भी शामिल हो सकती है।
  • अपराधियों ने तकनीकी और मनोवैज्ञानिक दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम को कैसे पहचाने?

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग बहुत चालाकी से आपको फंसाने की कोशिश करते हैं। लेकिन कुछ खास संकेत हैं जिन्हें पहचान कर आप इस जाल से बच सकते हैं।

अगर आपको ये संकेत नजर आएं तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

1. WhatsApp या Skype पर कॉल

असली पुलिस या CBI कभी भी WhatsApp, Skype या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कॉल नहीं करती। 

अगर कोई अधिकारी बनकर आपसे इन ऐप्स के जरिए संपर्क कर रहा है, तो यह पक्का धोखाधड़ी है।

ध्यान दें: सरकारी एजेंसियां केवल ऑफिशियल नंबरों या पत्रों के माध्यम से संपर्क करती हैं।

2. नकली पहचान पत्र और Warrant दिखाना

स्कैमर्स वीडियो कॉल के दौरान नकली ID कार्ड, गिरफ्तारी वारंट और अन्य सरकारी दस्तावेज दिखाते हैं।

ये दस्तावेज असली लगने के लिए बनाए जाते हैं लेकिन वास्तव में फर्जी होते हैं।

ऐसे डॉक्यूमेंट पर भाषा और लोगो का ध्यान दें, इनमें अक्सर गलतियां होती हैं।

3. पैसे भेजने का दबाव बनाना

वे कहते हैं कि “अगर आपने तुरंत पैसे नहीं भेजे तो आपको गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”

यह सबसे बड़ा लाल झंडा है क्योंकि असली एजेंसियां इस तरह कभी पैसों की मांग नहीं करतीं।

पैसे भेजने का टाइम लिमिट देना स्कैमर्स की सबसे बड़ी चाल होती है।

4. डराने वाली भाषा और टोन

फर्जी अधिकारी जानबूझकर सख्त और धमकाने वाले लहजे में बात करते हैं ताकि आप सवाल पूछने की हिम्मत न कर सकें।

यह उनका तरीका होता है कि आप घबरा कर जल्दबाजी में पैसे भेज दें।

डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें??

डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप सतर्क रहें और सही जानकारी रखें। स्कैमर्स का मुख्य उद्देश्य डर पैदा करना और जल्दबाजी में पैसे ऐंठना होता है।

अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगे तो आसानी से इस जाल से बच सकते हैं।

1. किसी भी कॉल पर घबराएं नहीं

अगर कोई व्यक्ति पुलिस या CBI का अधिकारी बनकर आपसे संपर्क करता है, तो सबसे पहले शांत रहें।

घबराने से आप उनकी चाल में फंस सकते हैं।

असली अधिकारी कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तार करने की धमकी नहीं देते।

2. व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें

कभी भी आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक डिटेल्स या OTP जैसी जानकारी फोन या वीडियो कॉल पर न दें।

सरकारी एजेंसियां फोन पर इस तरह की डिटेल्स नहीं मांगतीं।

3. कॉल रिकॉर्ड करें और नंबर ब्लॉक करें

ऐसे कॉल आते ही बातचीत रिकॉर्ड कर लें ताकि बाद में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।

इसके बाद नंबर को ब्लॉक कर दें।

आप Truecaller जैसे ऐप से भी नंबर की पहचान कर सकते हैं।

4. फर्जी दस्तावेजों की जांच करें

अगर कोई अधिकारी आपको ईमेल या व्हाट्सएप पर कोई दस्तावेज भेजता है, तो उसकी भाषा और लोगो पर ध्यान दें।

इनमें अक्सर अशुद्धियां होती हैं।

असली ईमेल हमेशा “.gov.in” या आधिकारिक डोमेन से आते हैं।

ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायत कैसे करें?

अगर गलती से आपने स्कैमर्स को पैसे भेज दिए हैं या अपनी कोई महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर दी है, तो घबराने की बजाय तुरंत सही कदम उठाना जरूरी है।

समय पर की गई कार्रवाई से नुकसान को कम किया जा सकता है।

1. बैंक और UPI ऐप को तुरंत सूचित करें:

अगर आपने ऑनलाइन पेमेंट किया है तो तुरंत अपने बैंक या UPI ऐप (Google Pay, PhonePe, Paytm) की हेल्पलाइन पर कॉल करें। उन्हें बताएं कि यह फ्रॉड था और पेमेंट को होल्ड या रिवर्स करने के लिए रिक्वेस्ट करें।

 2. साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज करें:

  • भारत सरकार की वेबसाइट पर जाएं।
  • “Report Other Cyber Crimes” सेक्शन में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करें।
  • स्कैम कॉल, पेमेंट रसीद और किसी भी फर्जी दस्तावेज का स्क्रीनशॉट अपलोड करें।
  • आपको complaint ID मिलेगी, जिसे संभालकर रखें।

3. पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएं:

अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर घटना की जानकारी दें। सभी सबूत साथ ले जाएं, जैसे कॉल रिकॉर्डिंग, चैट और बैंक स्टेटमेंट। पुलिस आपके मामले को साइबर सेल को फॉरवर्ड करेगी।

हमारी सहायता लें

अगर आपको समझ नहीं आ रहा कि शुरुआत कहां से करें या शिकायत दर्ज कराने में किसी तरह की परेशानी आ रही है, तो आप हमारी सहायता भी ले सकते हैं। 

अभी रजिस्टर करें और हमारी टीम आपको सही प्रक्रिया समझाने, जरूरी दस्तावेज़ जुटाने और सही अधिकारियों तक मामला पहुंचाने में मार्गदर्शन प्रदान करेग।

याद रखें, ऐसे मामलों में जितनी जल्दी कार्रवाई की जाए, उतना ही नुकसान रुकने की संभावना बढ़ जाती है। आप अकेले नहीं हैं, सही जानकारी और सही मदद आपको इस मुश्किल स्थिति से बाहर निकाल सकती है।

निष्कर्ष

डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक खतरनाक ऑनलाइन धोखाधड़ी है, जिसमें स्कैमर्स गिरफ्तारी का डर दिखाकर लोगों से पैसे ऐंठते हैं।

लेकिन सही जानकारी और थोड़ी सतर्कता से आप इस जाल में फंसने से बच सकते हैं।

याद रखें, असली पुलिस या CBI कभी भी WhatsApp या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती और न ही पैसे मांगती है

अगर आपको ऐसा कोई कॉल आए तो तुरंत इसे नजरअंदाज करें, नंबर ब्लॉक करें और साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज करें।

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