दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव में रहने वाले राजेश गुप्ता, 63 साल के एक सम्मानित बिजनेसमैन, सोशल मीडिया पर स्क्रॉल कर रहे थे। तभी एक एड दिखा—
“पुराने सिक्के लाखों-करोड़ों में बिक सकते हैं!”
वैसे तो उन्हें कोई खास दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन बस यूं ही एड पर क्लिक कर लिया।
कुछ ही देर में एक फोन आया—
“सर, हम पुराने और अनोखे सिक्कों के खरीदार हैं। अगर आपके पास कोई भी सिक्का है, तो उसकी कीमत लाखों-करोड़ों में हो सकती है!”
राजेश जी ने सोचा, “दादाजी के कुछ पुराने सिक्के रखे हैं, शायद इनमें से कोई कीमती निकले!”
“आपको अंदाज़ा भी नहीं कि आपके पास क्या खजाना है!”
“बस एक छोटा सा रजिस्ट्रेशन करना होगा, ₹25,000 देने होंगे।”
यहीं से जाल बिछने लगा…
झूठे वादों का सिलसिला
एक बार पैसे देने के बाद ठगों का खेल शुरू हो गया।
हर कुछ दिनों में एक नया बहाना—
- “सर, सिक्कों की असली पहचान करवाने के लिए एक प्रमाण पत्र बनवाना होगा।”
- “सर, विदेशी खरीदार सौदा पक्का करने के लिए एक प्रोसेसिंग फीस मांग रहे हैं।”
- “सर, सौदे को पूरा करने के लिए सुरक्षा मंजूरी जरूरी है, वरना पेमेंट अटक जाएगी।”
हर बार राजेश जी पैसे भेजते रहे, ये सोचकर कि बड़ी रकम बस मिलने ही वाली है।
₹33 लाख गवांने के बाद भी सौदा अधूरा!
महीनों बीत गए, लेकिन करोड़ों की डील पूरी नहीं हुई। जब राजेश जी ने और पैसे देने से मना किया, तो कॉल का टोन बदल गया।
“सर, हम पुलिस से बोल रहे हैं। आपके खिलाफ अवैध सिक्का व्यापार करने का मामला दर्ज हुआ है!”
डर के मारे उनका दिमाग सुन्न हो गया—“कहीं मैं किसी गैरकानूनी काम में तो नहीं फंस गया?”
लेकिन जब ‘पुलिसवाले’ ने केस खत्म करने के लिए पैसे मांगे, तब जाकर उन्हें समझ आया कि ये भी धोखाधड़ी का हिस्सा है!
आखिरकार सच सामने आया
राजेश जी ने हिम्मत जुटाई और असली पुलिस से संपर्क किया। जांच शुरू हुई और ठगों के नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन गवांए हुए ₹33 लाख वापस नहीं मिल सके।
इस हादसे ने राजेश गुप्ता जी को एक बात हमेशा के लिए सीखा दी..
- किसी भी स्कीम में बिना जांच-पड़ताल पैसे नहीं लगाने चाहिए, खासकर जहां पहले से पैसे मांगे जा रहे हों।
- लालच और डर, यही दो हथियार हैं जिनसे ठग आपको फंसाते हैं।
- कोई पुरानी चीज करोड़ों में बिक सकती है, ये सुनकर उत्साहित होने से पहले ये सोचिए कि कोई भी इतनी आसान कमाई क्यों नहीं छोड़ता!
ध्यान रखें—यहां अमीर बनने के सिर्फ दो रास्ते हैं, मेहनत और समझदारी। धोखाधड़ी में सिर्फ ठगों की जेब भरती है!