Investment Adviser Kitni Fees Le Sakta Hai: SEBI की Limit और Lakhs वाले Packages का सच

Investment Adviser Kitni Fees Le Sakta Hai

Quick Summary

SEBI के नियमों में investment adviser fees सिर्फ दो models में ले सकता है। पहला model, आपके under advice assets का एक तय percentage सालाना, जिसकी ऊपरी सीमा नियमों में लिखी है। दूसरा model, fixed fee, जिसकी भी सालाना अधिकतम सीमा तय है। Lifetime packages, jackpot plans और lakhs के one time packages इन दोनों models में fit ही नहीं होते। Limit से ज़्यादा ली गई fees अपने आप में violation है और उसका हिसाब refund claim का आधार बनता है। नीचे दोनों models, packages वाला खेल और ज़्यादा दी गई fees वापस माँगने का रास्ता है।

“Sir ये हमारा Diamond Package है। 3 lakh में 3 साल की premium advisory, unlimited calls।”

ऐसे packages रोज़ बिकते हैं। EMI पर भी। और खरीदने वाले को कभी कोई नहीं बताता कि SEBI ने investment adviser की fees पर सीमा लगा रखी है।

जी हाँ, सीमा। लिखित, कानूनी, नापी हुई सीमा। और बहुत मुमकिन है कि जो package आपको बेचा गया, वो उस सीमा को पहले दिन से लाँघ रहा था।

SEBI के दो fee models, आसान भाषा में

अगर आप किसी adviser को fees दे रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि SEBI के नियमों के मुताबिक वह आपसे सिर्फ दो ही तरीकों से fees वसूल सकता है:

Model 1: Assets का percentage। Adviser आपके under advice paise का एक छोटा सा percentage सालाना fees के तौर पर ले सकता है। नियमों में इसकी ऊपरी सीमा तय है, जो आपके पूरे portfolio के हिसाब से लगती है।

Model 2: Fixed fee। साल भर की एक तय रकम, चाहे portfolio छोटा हो या बड़ा। इसकी भी सालाना अधिकतम सीमा नियमों में लिखी है।

दो चीज़ें दोनों models में common हैं। हिसाब सालाना चलता है, lifetime नहीं। और limit हर client या family के हिसाब से लगती है, हर package के हिसाब से नहीं।

Fees की exact ऊपरी सीमा SEBI समय-समय पर update करती रहती है, इसलिए ताज़ा limit हमेशा SEBI के current नियमों से confirm कीजिए या consultation में पूछ लीजिए। पर एक बात हर दौर में सच रही है। वो अगले section में है।

Lakhs वाले packages इस system में आते ही नहीं

अब उस Diamond Package को इन नियमों के सामने रखिए।

3 lakh का 3 साल वाला package। Lifetime membership 5 lakh में। “Profit hone par upgrade” वाले plans। Jackpot calls का premium tier।

ये सब उस दुनिया की चीज़ें हैं जहाँ SEBI के fee नियम पहुँचे ही नहीं, क्योंकि इन्हें बेचने वालों ने नियम पढ़े ही नहीं। Registered IA का fee structure agreement में लिखा होता है, सालाना हिसाब से, तय models में।

जिसने आपको package बेचा, tier बेचा, lifetime बेचा, उसने आपको fees नहीं, product बेचा है। और यही बात आपके काम की है।

जो Limit से ऊपर गया, वो पैसा वापस आपका है

मान लीजिए आपने साल भर में adviser को 2 lakh दिए, और नियमों के हिसाब से आपके case में सालाना fees की सीमा इसका एक हिस्सा ही बनती थी।

तो बाकी रकम क्या है? वो excess है। नियम के बाहर ली गई रकम। और excess की वापसी माँगना कोई एहसान नहीं, claim है।

इस claim की खूबी ये है कि इसमें service की quality पर बहस ही नहीं होती। Tips अच्छी थीं या बुरी, loss हुआ या profit, ये सब अलग बातें हैं। Limit से ज़्यादा fees लेना अपने आप में गलत है, बाकी सब कुछ ठीक होने पर भी।

ये limit से ज़्यादा fees लेना खुद एक SEBI violation है, और इसके खिलाफ़ आप सीधा SEBI में complaint कर सकते हैं। 

पर एक सवाल यहीं उठता है, sebi complaint se paise wapas milte hain kya? इसका ईमानदार जवाब आगे के section में है। 

क्या Complaint से सच में Excess Fees वापस मिलती है?

एक investor का case था, जहाँ Aurostar Investment Advisory पर SEBI के fee cap को दरकिनार करने का आरोप साबित हुआ। 

Agreement में सालाना charges की सीमा ₹1,47,500 तय थी, और investor ने वो पूरी रकम पहले ही चुका दी थी।

इसके बावजूद firm का executive और पैसे माँगने पर अड़ा रहा। पहले ₹5,00,000 cash की माँग की गई, फिर बात 40% profit-sharing पर आ गई, जो investor के actual agreement में कहीं लिखा ही नहीं था। 

Cap से ऊपर पैसे लेने के लिए cash payments और किसी और के account से transfer माँगे गए, और तो और, एक नया contract किसी दूसरे के नाम पर बनवाया गया, जबकि investor का ही email और phone number account पर बना रहा।

हमारी टीम ने investor के payment records, agreement, और call recordings को व्यवस्थित रूप से जोड़कर एक मज़बूत case तैयार करने में मदद की।

Complaint से Excess Fees वापस मिलती है
Aurostar Investment Advisory NSE arbitration award: ₹15.57 Lakhs recovery

Arbitration के ज़रिए investor को trade loss compensation और fees का पूरा refund दिलाया गया।

Total recovery: ₹15,57,000, साथ ही award की तारीख से 15% सालाना ब्याज (देर होने पर 18%)।

आप भी चाहते हैं ऐसे ही complaint file करना? पूरा process यहाँ पढ़िए: investment advisor ki shikayat kaise kare

अपनी Excess Fees निकालने का तरीका 

तीन कागज़ इकट्ठा कीजिए।

  • हर payment का record। UPI, bank transfer, हर installment, upgrade के नाम पर दी गई हर रकम। सब जोड़िए, सालाना हिसाब से।
  • Agreement, अगर मिला था। उसमें लिखा fee structure देखिए। लिखी fees और ली गई fees का फर्क खुद एक कहानी कहता है। Agreement मिला ही नहीं था, तो वो अपने आप में दूसरा violation है, जिसकी पूरी बात IA नियमों वाली guide में है: investment adviser ke sebi rules 
  • Package की बातचीत। जिस chat या call में package बेचा गया, upgrade का pressure बना, वो screenshots। यही दिखाते हैं कि fees नहीं, packages बिक रहे थे।

इन तीनों से आपके case का excess निकलता है। और यही रकम आपकी complaint की रीढ़ बनती है।

आपके payments का हिसाब लगाकर ये बताना कि आपके case में कितना excess बनता है और उसे वापस माँगने का सही रास्ता कौन सा है, यही हमारी टीम आपकी मदद करती है। Payment records साथ रखिए। यहाँ register करें

निष्कर्ष

Lakhs के packages, lifetime plans, या profit-sharing के नाम पर ली गई फीस SEBI के fee cap के दायरे से बाहर हैं, चाहे उन्हें कितना भी legit दिखाया जाए। 

Excess fees सिर्फ़ बुरी deal नहीं, एक साफ़ violation है, और आपके payment records ही उसका सबसे मज़बूत सबूत हैं। 

Aurostar जैसे cases दिखाते हैं कि सही documents के साथ recovery मुमकिन है, चाहे रकम कितनी भी बड़ी क्यों न हो। 

अपने records इकट्ठा कीजिए और आज ही अपने case की सही दिशा तय कीजिए।

Frequently Asked Questions

हाँ, SEBI ने research analyst की fees पर भी सालाना सीमा लगाई हुई है। इसलिए lakhs के packages वहाँ भी उतने ही गलत हैं। RA वाले case में भी हिसाब का तरीका यही है, payment records जोड़िए और सालाना limit से मिलाइए।

ये limit से बचने का सबसे पुराना रास्ता है। नाम कुछ भी हो, अगर package के बदले आपको advice, calls या recommendations मिल रही थीं, तो वो advisory fees ही है। Chat में मिली calls खुद साबित करती हैं कि बेचा क्या गया था।

बिल्कुल नहीं, बल्कि EMI का record payment का पक्का सबूत है। EMI चल रही है तो उसे रोकने का फ़ैसला सोच समझ कर लीजिए, क्योंकि loan आपके नाम पर है। पहले claim का रास्ता बनाइए, EMI की strategy उसके साथ तय कीजिए।

SEBI के fee नियमों में limit family level पर देखी जाती है। एक ही घर के लोगों से अलग अलग नाम पर fees लेना limit का रास्ता काटने की कोशिश हो सकती है। तीनों के payment records साथ रखिए, ये pattern आपके case को और मज़बूत करता है।

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