Quick Summary
सेबी रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर का नंबर INA से शुरू होता है। शिकायत सबसे पहले एडवाइजर को लिखित में जाती है, और उसे 21 दिन में जवाब देना होता है। जवाब न मिले तो SCORES पर जाइए, जहां पहला रिव्यू IAASB करता है और दूसरा सेबी। उसके बाद SMART ODR का रास्ता खुलता है। एडवाइजर एक परिवार से साल में ₹1,51,000 या एसेट का 2.5 प्रतिशत, जो ज़्यादा हो, उससे ज़्यादा फीस नहीं ले सकता।
इन्वेस्टमेंट एडवाइजर की शिकायत कैसे करें, यह सवाल अक्सर उस दिन उठता है जब एडवाइजर ने कहा था कि रिटर्न पक्का है और अब आपका फोन उठाना बंद कर दिया।
आपने फीस दी, सलाह मानी और नुकसान हुआ।
अब आपको यह जानना है कि कौन सी बात शिकायत बनाती है और कहां जाना है।
जवाब सीधा है। रास्ता तीन पड़ाव का है, और हर पड़ाव पर आपके पास कुछ पक्के हक हैं जो ज़्यादातर निवेशकों को पता ही नहीं होते।
इन्वेस्टमेंट एडवाइजर की शिकायत कैसे करें, सबसे पहले क्या करें?
सबसे पहला कदम एडवाइजर को लिखित शिकायत भेजना है।
फोन पर हुई शिकायत कागज़ पर नहीं गिनी जाती, इसलिए ईमेल या उनके शिकायत फॉर्म से भेजिए।
अगर आप सोच रहे हैं कि investment advisor ki shikayat kaise kare, तो शुरुआत लिखित शिकायत और उससे जुड़े सबूतों को सुरक्षित रखने से करें।
इसमें अपनी बात छोटे तथ्यों में लिखिए।
कौन सी तारीख को क्या सलाह मिली, आपने कितनी फीस दी और अब आप क्या चाहते हैं।
यह पहला कदम इसलिए ज़रूरी है कि सेबी के नियम में निवेशक पहले उसी कंपनी तक जाता है।
और एडवाइजर को भी अपनी शिकायत व्यवस्था में 21 दिन के अंदर जवाब देना चाहिए।
इन 21 दिनों में तीन चीज़ें करते रहिए। जवाब की तारीख लिखिए, टिकट नंबर संभालिए और हर मैसेज का स्क्रीनशॉट रखिए।
अगर 21 दिन बाद भी कोई ठोस जवाब नहीं आया, या जवाब आपके सवाल को छुए बिना निकल गया, तो अगला पड़ाव SCORES है।
उसके स्टेप आगे उसी जगह मिलेंगे जहां उनकी बात बनती है।
अब यह देख लेते हैं कि आप जिसकी शिकायत कर रहे हैं वह वाकई इन्वेस्टमेंट एडवाइजर है या कुछ और।
कैसे पता करें कि एडवाइजर सेबी में रजिस्टर्ड है?
पहले यह तय कीजिए कि सामने वाला कौन है।
कई लोग खुद को एडवाइजर बताते हैं, पर सेबी के खाते में वे रिसर्च एनालिस्ट, पोर्टफोलियो मैनेजर या किसी और श्रेणी में निकलते हैं।
पहचान का सबसे आसान तरीका रजिस्ट्रेशन नंबर है।
इन्वेस्टमेंट एडवाइजर का नंबर INA से शुरू होता है, जबकि रिसर्च एनालिस्ट का नंबर INH से शुरू होता है।
इसलिए अपने एग्रीमेंट या एडवाइजर की वेबसाइट पर लिखा नंबर उठाइए और सेबी की साइट पर रजिस्टर्ड इंटरमीडियरी की सूची में उसे मिलाइए।

नाम, नंबर और रजिस्ट्रेशन की वैधता तीनों एक जैसे दिखें, तभी आगे बढ़िए।
नंबर पर शक हो तो यह मत मानिए कि सब सही है।
ठग कई बार असली रजिस्टर्ड कंपनियों के नंबर की नकल करते हैं, और ऐसे मामलों को कैसे पहचानें, इसका जवाब सेबी रजिस्ट्रेशन नंबर का दुरुपयोग में विस्तार से मिलता है।
नंबर सही निकले, तब अगला सवाल यह है कि एडवाइजर ने ऐसा क्या किया जिस पर शिकायत बनती है।
SEBI me advisor ki shikayat kaise kare, यह जानने से पहले एडवाइजर की सही श्रेणी और रजिस्ट्रेशन की वैधता जांचना जरूरी है।
इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और रिसर्च एनालिस्ट का फर्क शिकायत में क्यों मायने रखता है?
आम बोलचाल में लोग हर सलाह देने वाले को “एडवाइजर” कह देते हैं।
पर सेबी के रिकॉर्ड में इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और रिसर्च एनालिस्ट दो अलग श्रेणियां हैं।
फर्क आपके लिए इसलिए बड़ा है कि SCORES के फॉर्म में आपको कंपनी का टाइप चुनना पड़ता है।
इन्वेस्टमेंट एडवाइजर के मामले में पहला रिव्यू IAASB करता है, जबकि रिसर्च एनालिस्ट के मामले में यह काम RAASB के पास जाता है।
टाइप गलत चुन लिया तो शिकायत गलत डेज़िग्नेटेड बॉडी के पास पहुंच सकती है, और जवाब आने में बेवजह देर होती है।
इसलिए एग्रीमेंट पर लिखी श्रेणी और INA या INH नंबर देखकर ही चुनाव कीजिए।
अगर आपके कागज़ में नंबर INH से शुरू होता है, तो आपका मामला रिसर्च एनालिस्ट का है।
तब भी शिकायत का क्रम वही रहता है, बस बीच के रिव्यू की संस्था बदल जाती है।
किन बातों पर एडवाइजर की शिकायत बनती है?
हर नुकसान शिकायत नहीं होता।
बाजार में पैसा गिर भी सकता है, और सिर्फ नुकसान का होना अपने आप एडवाइजर की गलती नहीं बनाता।
Advisor ki shikayat का आधार नियमों का उल्लंघन, गलत वादे या एग्रीमेंट की शर्तें तोड़ना होना चाहिए।
नीचे चार आम स्थितियां हैं, अपनी बात इनसे मिलाइए।

- पक्के रिटर्न का वादा। “इतना मुनाफा गारंटी है” या “नुकसान हुआ तो हम भरपाई करेंगे” जैसी बात, जो आपके पास मैसेज या रिकॉर्डिंग में है।
- सीमा से ज़्यादा फीस। एडवाइजर ने आपके परिवार से नियम की तय सीमा से ऊपर पैसा लिया।
- आपके पैसे अपने पास मंगवाना। एडवाइजर का काम सलाह देना है, इसलिए निवेश का पैसा उसके अपने या किसी तीसरे के खाते में भेजना खतरे की घंटी है।
- लिखित एग्रीमेंट और रसीद का न होना। आपने पैसा दिया, पर न शर्तों का कागज़ है और न फीस की रसीद।
इनमें से कोई एक स्थिति भी आपकी शिकायत की नींव बन सकती है, बशर्ते आपके पास उसका कागज़ी निशान हो। अगली बात इसी निशान की है।
एडवाइजर कितनी फीस ले सकता है, सेबी की सीमा क्या है?
फीस का मामला सबसे ज़्यादा शिकायतों की जड़ है, इसलिए इसे अलग से समझ लीजिए।
नियम सीधा है, और उसे जानना आपका पहला हथियार है।
एक परिवार से एडवाइजर साल में ₹1,51,000 तक फीस ले सकता है।
दूसरा तरीका एसेट आधारित फीस का है, जिसमें सीमा आपके एसेट का 2.5 प्रतिशत सालाना है।
इन दोनों में जो रकम ज़्यादा बैठे, वही अधिकतम सीमा है। इसके ऊपर लिया हुआ हर रुपया शिकायत का आधार बनता है।
फीस हमेशा बैंक के रास्ते जाए और हर भुगतान की साइन की हुई रसीद आपके पास रहे।
नकद या किसी निजी खाते में दी गई फीस आगे साबित करना मुश्किल कर देती है।
सलाहकार के नियमों की बाकी बारीकियां, जैसे एग्रीमेंट में क्या लिखा होना चाहिए, इन्वेस्टमेंट एडवाइजर के नियम में अलग से लिखी हैं।
फीस की गणना करते वक्त उसे हाथ में रखिए।
अगर आपकी फीस सीमा से ऊपर निकली, तो शिकायत में रकम और रसीद साथ लगाइए।
अब सवाल यह है कि कौन से कागज़ आपकी बात को ठोस बनाते हैं।
एडवाइजर की शिकायत के लिए कौन से सबूत जमा करें?
शिकायत की ताकत आपके कागज़ों से आती है, आपके गुस्से से नहीं।
जिस आदमी को आपका केस पढ़ना है, उसने न आपका एडवाइजर देखा है और न वह बातचीत सुनी है।
इसलिए नीचे की चीज़ें एक फोल्डर में रखिए और हर फाइल को ऐसा नाम दीजिए जो खुद बोले, जैसे “एग्रीमेंट” या “फीस की रसीद मार्च”।
- एडवाइजरी एग्रीमेंट। वह कागज़ जिसमें फीस, सेवा और शर्तें लिखी थीं।
- फीस की रसीद और बैंक स्टेटमेंट। यह दिखाता है कि आपने कब और कितना दिया।
- सलाह के मैसेज और कॉल की जानकारी। व्हाट्सऐप, ईमेल या एसएमएस जिसमें कॉल, लक्ष्य और स्टॉप लॉस की बात हुई।
- एडवाइजर के विज्ञापन या वादे के स्क्रीनशॉट। तारीख और लिंक के साथ।
- आपके अपने ट्रेड का रिकॉर्ड। ताकि साफ दिखे कि सलाह के बाद क्या हुआ।
स्क्रीनशॉट लेते वक्त पूरी स्क्रीन लीजिए, ताकि तारीख, नंबर और नाम कटे नहीं। अधूरे स्क्रीनशॉट अक्सर सवाल बनकर लौटते हैं।
अगर आपने किसी बात पर सिर्फ फोन पर भरोसा किया था, तब भी रुकिए मत।
बाद में उसी बात को ईमेल में लिखकर भेज दीजिए और जवाब का रिकॉर्ड रखिए।
एडवाइजर की शिकायत में क्या लिखें और किन बातों से बचें?
सबूत इकट्ठे हो गए, तो अब शिकायत का मसौदा बनता है।
यहां ज़्यादातर निवेशक गुस्से में लिखते हैं, और यही गुस्सा शिकायत को कमज़ोर कर देता है।
अच्छी शिकायत एक छोटी कहानी की तरह चलती है। उसमें शुरुआत, बीच और आज की हालत तीनों साफ दिखनी चाहिए।
इस क्रम में लिखिए। पहले एडवाइजर का नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर, फिर आपने कब और कितनी फीस दी, फिर कौन सी सलाह मिली, और आखिर में आज आपकी रकम की क्या हालत है।
हर वाक्य में एक तथ्य रखिए, जैसे “12 जून को मैंने ₹60,000 फीस दी और रसीद साथ लगी है।”
इस तरह की लाइन पढ़ने वाले के लिए सीधा सबूत बन जाती है।
भाषा पर थोड़ा ध्यान दीजिए। “एडवाइजर ने मुझे लूटा” जैसी बात आपके कागज़ से साबित नहीं होती, इसलिए उसकी जगह वही लिखिए जो हुआ: “सलाह में 40 प्रतिशत रिटर्न का वादा किया गया, जिसका मैसेज साथ लगा है।”
आखिर में अपनी मांग भी एक वाक्य में लिख दीजिए।
यह फीस की वापसी हो सकती है, सीमा से ऊपर ली गई रकम की वापसी हो सकती है, या वादे के आधार पर हुए नुकसान का हिसाब।
जो मांग आप कागज़ से साबित कर सकते हैं, वही रखिए। बहुत ऊंची मांगी गई रकम कंसिलिएशन में आपके खिलाफ काम करती है।
एडवाइजर की शिकायत SCORES से SMART ODR तक कैसे जाती है?
एडवाइजर के मामले में रास्ता तीन पड़ाव का है, और हर पड़ाव की अपनी घड़ी है।
पहले कंपनी, फिर SCORES, और अंत में SMART ODR।
SCORES पर एडवाइजर के मामले का पहला रिव्यू IAASB करता है, यानी इन्वेस्टमेंट एडवाइजर एडमिनिस्ट्रेशन एंड सुपरवाइजरी बॉडी।
दूसरा रिव्यू सेबी खुद करता है।
SCORES पर शिकायत डालने की पूरी प्रक्रिया, यानी रजिस्ट्रेशन, फॉर्म, 21 दिन का जवाब और दोनों रिव्यू की समयसीमा सेबी से शिकायत कैसे करें में कदम दर कदम खोलकर लिखी है।
एडवाइजर के मामले में आपको बस इतना याद रखना है कि फॉर्म में कंपनी का टाइप इन्वेस्टमेंट एडवाइजर चुनें और नाम वैसा लिखें जैसा रजिस्ट्रेशन में है।
SCORES और रिव्यू के बाद भी बात न बने तो ODR का दरवाज़ा खुलता है।
वहां प्री कंसिलिएशन, कंसिलिएशन और ज़रूरत हो तो आर्बिट्रेशन चलता है, जिसकी पूरी चाल SMART ODR में शिकायत कैसे करें में बताई गई है।
एक बात यहां ध्यान से पकड़िए।
SCORES की शिकायत लंबित रहते हुए वही विवाद ODR पर डाला, तो SCORES वाली शिकायत बंद मान ली जाती है।
एडवाइजर ने कहा था कि नुकसान की भरपाई कर देगा, और अब वह फोन ही नहीं उठा रहा?
हम आपका एग्रीमेंट, फीस की रसीद और मैसेज पढ़कर बताते हैं कि शिकायत किस नियम पर टिकेगी और SCORES, रिव्यू या ODR में पहला कदम कौन सा हो। हमारे साथ रजिस्टर करें।
बिना रजिस्ट्रेशन वाले एडवाइजर की शिकायत कैसे करें?
कई बार पता चलता है कि जिसने आपको सलाह दी, उसका सेबी में कोई रजिस्ट्रेशन ही नहीं है।
ऐसे में आपकी हालत थोड़ी अलग है, और इसे अलग तरह से संभालना पड़ता है।
पहले रजिस्ट्रेशन जांचिए, ताकि आप बिना जांचे किसी पर आरोप न लगाएं।
नंबर सेबी की सूची में न मिले, तो इसे आप सिर्फ एक तथ्य की तरह शिकायत में लिखिए।
सेबी के अपने नियमों में बिना रजिस्ट्रेशन की गतिविधि को SCORES की आम निवेशक शिकायतों में नहीं गिना गया है।
इसलिए ऐसे मामले में पैसे की वापसी का रास्ता अक्सर अलग होता है।
पैसा किसी ठगी के बहाव में चला गया हो, तो शुरुआत के लिए मेरे साथ फ्रॉड हुआ है मैं क्या करूं में बताए कदम देखिए।
बैंक को तुरंत लिखित सूचना देना सबसे पहला काम है।
एडवाइजर की शिकायत के बाद पैसा वापस मिलता है क्या?
यह वह सवाल है जो हर निवेशक के मन में सबसे ऊपर रहता है, इसलिए इसका सीधा जवाब सुन लीजिए।
शिकायत डालने से पैसा अपने आप वापस नहीं आता।
SCORES में सेबी एडवाइजर से जवाब और कार्रवाई मांगता है।
रजिस्ट्रेशन पर कार्रवाई जैसे कदम सेबी के अधिकार में हैं, पर शिकायत सीधे रिफंड का आदेश नहीं बनती।
पैसा वापस मिलने की असली संभावना दो जगह बनती है।
एक, एडवाइजर आपसी समझौते में फीस लौटाने पर राज़ी हो जाए, और दो, ODR की कंसिलिएशन या आर्बिट्रेशन में आपके पक्ष में अवार्ड आए।
दोनों जगह एक ही चीज़ काम करती है, आपके सबूत। जितना साफ रिकॉर्ड, उतनी मज़बूत मांग।
इसलिए शिकायत की रकम तय करते वक्त वही मांगिए जो कागज़ से साबित हो सके।
जैसे सीमा से ज़्यादा ली गई फीस या वादे के आधार पर किया गया नुकसान।
एडवाइजर चुनते वक्त क्या जांचें ताकि शिकायत की नौबत न आए
सबसे सस्ता इलाज बचाव है। शिकायत का पूरा रास्ता जान लेना अच्छा है, पर उसकी ज़रूरत ही न पड़े, यह उससे बेहतर है।
नीचे वे आदतें हैं जो सेबी के निवेशक चार्टर में भी दी गई हैं।
इन्हें एडवाइजर चुनने से पहले एक बार पढ़ लीजिए।
- पहले रजिस्ट्रेशन मिलाइए। INA नंबर और उसकी वैधता सेबी की सूची में जांचिए।
- निवेश का पैसा एडवाइजर को मत दीजिए। फीस के अलावा कोई रकम उसके पास नहीं जानी चाहिए।
- लगातार आने वाले कॉल से मत झुकिए। जल्दबाज़ी और सीमित समय की छूट अक्सर दबाव बनाने का तरीका होती है।
- हर शर्त लिखित में लीजिए। फीस, सेवा और शर्तें साइन करके अपने पास रखिए।
एडवाइजर की वेबसाइट पर शिकायतों का मासिक डेटा भी एक अच्छा संकेत है।
सेबी ने एडवाइजर को यह जानकारी हर महीने की सात तारीख तक अपनी साइट पर डालने को कहा है।
वहां डेटा दिखे तो यह आपके फैसले का एक हिस्सा बन सकता है। और न दिखे तो यह बस एक बात है जिसे आप खुद एडवाइजर से पूछ सकते हैं।
निष्कर्ष
इन्वेस्टमेंट एडवाइजर की शिकायत कैसे करें, इसका जवाब तीन पड़ाव में है।
पहले एडवाइजर को लिखित शिकायत, फिर SCORES, और उसके बाद SMART ODR।
हर पड़ाव पर आपकी सबसे बड़ी ताकत आपका रिकॉर्ड है।
इसलिए आज ही एक फोल्डर बनाइए जिसमें एग्रीमेंट, रसीदें, मैसेज और स्क्रीनशॉट एक जगह हों।
फीस की सीमा याद रखिए और रजिस्ट्रेशन नंबर मिलाइए। फिर शिकायत में सिर्फ वह लिखिए जो आपके कागज़ दिखाते हैं।
आपके पास रास्ता है और हर पड़ाव का नियम तय है। बस सही क्रम में, सही सबूत के साथ पहला कदम उठाइए।
Report. Recover. Stay Fraud Free.
Frequently Asked Questions
हां, सेबी के निवेशक चार्टर के हिसाब से आप सलाह मानने से पहले रिस्क प्रोफाइलिंग मांग सकते हैं और सलाह उसी के मुताबिक होनी चाहिए। प्रोफाइल का फॉर्म सेव रखिए, क्योंकि यह शिकायत में काम आता है।
हां, आपको किसी भी वक्त सर्विस से बाहर निकलने का हक है। निकलने से पहले एग्रीमेंट में फीस वापसी की शर्त पढ़िए और सर्विस छोड़ने की बात ईमेल में लिखकर भेजिए, ताकि तारीख का रिकॉर्ड बन जाए।
सेबी ने एडवाइजर से हर महीने की सात तारीख तक शिकायतों का डेटा साइट पर डालने को कहा है। न दिखे तो एडवाइजर को ईमेल करके उसके बारे में पूछिए और जवाब का स्क्रीनशॉट रखिए।
हां, पर आपके पास उसका रिकॉर्ड होना चाहिए। व्हाट्सऐप चैट, ईमेल और कॉल की तारीख वाले स्क्रीनशॉट आपकी बात को सहारा देते हैं। सिर्फ याद के भरोसे की गई शिकायत कमज़ोर पड़ती है।
नहीं, सेबी के चार्टर में साफ लिखा है कि एडवाइजर के साथ ट्रेडिंग, डीमैट या बैंक का लॉगिन साझा नहीं करना चाहिए। लॉगिन दे चुके हैं तो तुरंत पासवर्ड बदलिए और ब्रोकर को लिखित सूचना दीजिए।






