Quick Summary
SMART ODR सेबी का ऑनलाइन विवाद निपटारा पोर्टल है, जिसका पता smartodr.in है। यहां PAN, ईमेल और मोबाइल से रजिस्टर करके शिकायत और सबूत डालते हैं। पहले 21 दिन प्री कंसिलिएशन चलती है, फिर कंसिलिएशन, और बात न बने तो आर्बिट्रेशन। रजिस्ट्रेशन और प्री कंसिलिएशन फ्री हैं, और कंसिलिएशन की फीस कंपनी भरती है। एक बात पहले जान लीजिए। SCORES की शिकायत लंबित रहते हुए वही विवाद ODR पर डाला, तो SCORES की शिकायत बंद मान ली जाती है।

4800+ विवाद
दर्ज हुए
2026 में SMART ODR से
हालांकि, सही प्रक्रिया अपनाकर इसकी भरपाई की जा सकती है।
क्या आपके साथ भी धोखाधड़ी हुई है?
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आइए, शिकायत दर्ज करने में आपकी मदद करें!
SMART ODR में शिकायत कैसे करें, यह सवाल आमतौर पर तब आता है जब ब्रोकर या एडवाइजर आपका पैसा रोककर बैठा हो और जवाब देना बंद कर चुका हो।
आप कंपनी को लिख चुके हैं, शायद SCORES पर भी गए हैं, और अब कोई ऐसा रास्ता चाहिए जहां फैसला हो सके।
ODR वही रास्ता है। यहां बात सुलह से शुरू होती है और ज़रूरत पड़े तो आर्बिट्रेशन तक जाती है, वो भी घर बैठे ऑनलाइन।
पर इस रास्ते में एक या दो मोड़ ऐसे हैं जहां निवेशक अक्सर गलत कदम उठा लेते हैं।
इसलिए नीचे पहले स्टेप समझिए, फिर फीस, समयसीमा और उन गलतियों पर आइए जो शिकायत को कमज़ोर कर देती हैं।
SMART ODR में शिकायत कैसे करें, पूरे स्टेप
अगर आप सीधे यही जानने आए हैं कि SMART ODR me shikayat kaise kare, तो नीचे के छह स्टेप ही आपका नक्शा हैं।
इन्हें उसी क्रम में कीजिए, क्योंकि हर स्टेप अगले स्टेप का सबूत बनाता है।
और अगर आपका मामला पहले से कुछ आगे बढ़ चुका है, तो अपना स्टेप ढूंढिए और वहीं से शुरू कीजिए।
- कंपनी को लिखित शिकायत भेजें। ईमेल या उनके शिकायत पोर्टल से भेजिए और टिकट नंबर या जवाब की कॉपी सेव कीजिए। सेबी के नियम में यह पहली शर्त है कि निवेशक पहले उसी कंपनी से बात करे।
- जवाब का इंतज़ार कीजिए और तारीख लिखिए। कंपनी ने कुछ नहीं किया या आपको जवाब पसंद नहीं आया, तभी अगला कदम बनता है।
- smartodr.in पर रजिस्टर कीजिए। PAN, ईमेल और मोबाइल नंबर डालकर लॉगिन बनाइए।
- शिकायत की जानकारी भरिए। कंपनी का नाम, विवाद की रकम, तारीखें और पूरी घटना सीधे तथ्यों में लिखिए।
- सबूत अपलोड कीजिए। कॉन्ट्रैक्ट नोट, स्टेटमेंट, पेमेंट की रसीद और कंपनी से हुई बातचीत जोड़िए।
- जमा करके शिकायत नंबर रखिए। शिकायत जमा होते ही वह पोर्टल के जरिए संबंधित एक्सचेंज तक पहुंचती है और प्री कंसिलिएशन का समय शुरू हो जाता है।
इन छह स्टेप में सबसे ज़्यादा लोग चौथे और पांचवें पर चूकते हैं।

रकम और तारीख गलत लिखी जाए या सबूत अधूरे हों, तो आगे हर चरण में सवाल उठते हैं।
इसलिए शिकायत जमा करने से पहले एक बार पूरी कहानी खुद को सुना लीजिए।
अगर कोई तीसरा आदमी उसे पढ़कर समझ जाए, तो आपकी शिकायत तैयार है।
SMART ODR क्या है और किन कंपनियों के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं?
SMART ODR सेबी का ऑनलाइन विवाद निपटारा सिस्टम है।
इसमें निवेशक और बाजार की कंपनी के बीच का झगड़ा कोर्ट गए बिना ऑनलाइन सुलझाया जाता है।
पहले यह ज़्यादातर ब्रोकर के विवादों के लिए जाना जाता था। अब इसका दायरा काफी बड़ा है।
सेबी ने इस पोर्टल पर इन कंपनियों को शामिल किया है।
आपकी शिकायत जिस कंपनी से है, उसे इस सूची में ढूंढिए।
- स्टॉक ब्रोकर और डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट
- इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और रिसर्च एनालिस्ट
- म्यूचुअल फंड कंपनियां और पोर्टफोलियो मैनेजर
- AIF के फंड मैनेजर
- रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट
अगर आपका विवाद ब्रोकर से है और आप समझना चाहते हैं कि पहली लिखित शिकायत किस पते पर भेजें, तो ब्रोकर की शिकायत कहां करें में पूरा रास्ता मिल जाता है।
कुछ मामले ऐसे हैं जहां ODR का दरवाज़ा बंद है।
अगर वही मामला पहले से कोर्ट, ट्रिब्यूनल, कंज्यूमर फोरम या किसी आर्बिट्रेशन में चल रहा है, तो उसे ODR पर नहीं डाल सकते।
सरकार या किसी राज्य सरकार के खिलाफ विवाद भी इस पोर्टल पर नहीं चलता।
और जो विवाद कानून के हिसाब से आर्बिट्रेशन के लायक ही नहीं है, वह भी बाहर रहता है।
सलाहकारों के मामले में कई निवेशक पूछते हैं कि कौन सा नियम टूटा है।
ऐसे में इन्वेस्टमेंट एडवाइजर के नियम पढ़कर आप शिकायत में सही नियम का नाम लिख सकते हैं।
SMART ODR से पहले SCORES या सीधे ODR, कौन सा रास्ता चुनें?
सेबी का तय क्रम साफ है। पहले कंपनी से शिकायत, फिर SCORES, और उसके बाद ODR।
पर यहां एक पेच है जो बहुत लोगों को महंगा पड़ता है।
अगर आपकी शिकायत SCORES पर लंबित है और आपने वही विवाद SMART ODR पर भी डाल दिया, तो SCORES की शिकायत बंद मान ली जाती है।
उसे बाद में SCORES पर दोबारा नहीं डाल सकते।
इसलिए SMART ODR me complaint kaise karen, यह तय करने से पहले SCORES में अपनी शिकायत की स्थिति जांचिए।
एक बार वह दरवाज़ा खुला तो SCORES वाला रास्ता पीछे से बंद हो जाता है।
इसलिए पहले देखिए कि SCORES में आप कहां खड़े हैं।
अगर कंपनी का एक्शन टेकन रिपोर्ट आ चुका है और रिव्यू की खिड़की खुली है, तो आप दोनों रास्तों का हिसाब लगा सकते हैं।
SCORES की पूरी प्रक्रिया, 21 दिन का जवाब और दोनों रिव्यू के नियम सेबी से शिकायत कैसे करें में अलग से खोलकर समझाए हैं।
आपकी SCORES शिकायत लंबित है और अब आप ODR डालने से डर रहे हैं कि कहीं पुरानी शिकायत बंद न हो जाए?
हम आपका SCORES रिकॉर्ड, कंपनी का जवाब और सबूत देखकर बताते हैं कि अभी ODR डालना ठीक रहेगा या पहले रिव्यू मांगना बेहतर है। हमारे साथ रजिस्टर करें।
SMART ODR पर शिकायत के लिए कौन से दस्तावेज़ चाहिए?
ODR में आपकी शिकायत का वज़न आपके कागज़ों से बनता है।
पोर्टल पर आप सबूत अपलोड करते हैं, और कंसिलिएटर या आर्बिटरेटर वही पढ़ते हैं जो आपने डाला है।
बहुत से निवेशक SMART ODR me shikayat kaise kare खोजते हुए सीधे फॉर्म पर पहुंच जाते हैं और दस्तावेज़ बाद में ढूंढते हैं।
बेहतर है कि नीचे दी गई चीज़ें पहले एक फोल्डर में रख लें।
इससे फॉर्म भरने में बीस मिनट लगेंगे, दो घंटे नहीं।
- पहचान और अकाउंट की जानकारी। PAN, क्लाइंट कोड या डीमैट अकाउंट नंबर।
- लेनदेन का रिकॉर्ड। कॉन्ट्रैक्ट नोट, लेजर, ट्रेड बुक और पेमेंट की रसीदें।
- कंपनी से बातचीत। आपकी लिखित शिकायत, उनका जवाब, टिकट नंबर और चैट के स्क्रीनशॉट।
- SCORES की कॉपी। अगर आप SCORES पर पहले जा चुके हैं, तो शिकायत संख्या और उसका जवाब साथ रखिए।
फाइल जोड़ते समय नाम साफ रखिए, जैसे “कॉन्ट्रैक्ट नोट मार्च” या “कंपनी का जवाब”।
जिस आदमी को आपका केस पहली बार पढ़ना है, उसके लिए यह बहुत बड़ी मदद है।
SMART ODR में शिकायत डालने के बाद क्या होता है?
शिकायत जमा होने के बाद आपका मामला तीन चरणों में चलता है।
पहले प्री कंसिलिएशन, फिर कंसिलिएशन, और ज़रूरत हो तो आर्बिट्रेशन।

हर चरण की अपनी घड़ी है, इसलिए नीचे चारों बातें उसी क्रम में हैं जिसमें आपका केस आगे बढ़ेगा।
प्री कंसिलिएशन में 21 दिन क्या होता है?
पहला चरण सबसे हल्का है।
संबंधित एक्सचेंज या डिपॉजिटरी आपकी शिकायत देखती है और दोनों पक्षों से बात करके आपसी समझौता कराने की कोशिश करती है।
इसके लिए 21 कैलेंडर दिन मिलते हैं, जो शिकायत जमा होने की तारीख से गिने जाते हैं। इस चरण की कोई फीस नहीं है।
यहां शिकायत सिर्फ ईमेल में नहीं रहती।
वह एक औपचारिक प्रक्रिया में दर्ज हो जाती है, और कंपनी को उसका जवाब देना पड़ता है।
कंसिलिएशन कैसे चलती है और कितना समय लगता है?
प्री कंसिलिएशन में बात न बने तो आप पोर्टल से कंसिलिएशन शुरू कर सकते हैं।
यहां एक निष्पक्ष कंसिलिएटर दोनों पक्षों की बात सुनकर रास्ता निकालने में मदद करता है।
कंसिलिएटर रेफरेंस के 5 दिन के अंदर तय होता है।
कंसिलिएशन का समय 21 दिन है, और दोनों पक्ष राज़ी हों तो इसे 10 दिन और बढ़ा सकते हैं।
अगर यहां भी सुलह नहीं हुई, तो कंसिलिएटर एक मान्य क्लेम रकम तय करता है। फिर कोई भी पक्ष आर्बिट्रेशन में जा सकता है।
आर्बिट्रेशन में फैसला कितने दिन में आता है?
आर्बिट्रेशन ODR का आखिरी चरण है, और यहां आर्बिटरेटर का फैसला दोनों पक्षों पर लागू होता है।
रेफरेंस और फीस जमा होने के 5 दिन के अंदर आर्बिटरेटर नियुक्त होता है।
अवार्ड नियुक्ति के 30 दिन में आना चाहिए। ज़रूरत पड़े तो 30 दिन और मिल सकते हैं।
क्लेम ₹1,00,000 या उससे कम हो तो फैसला सिर्फ कागज़ों के आधार पर होता है।
₹30 लाख से ऊपर के क्लेम में तीन आर्बिटरेटर की ट्रिब्यूनल बैठती है।
अवार्ड के बाद पैसा कब मिलता है?
अवार्ड आपके पक्ष में आए तो कंपनी को पैसा 15 कैलेंडर दिन में देना होता है।
और अवार्ड में इससे पहले की तारीख लिखी हो तो वही लागू होगी।
कंपनी चाहे तो अवार्ड को कोर्ट में सेक्शन 34 के तहत चुनौती दे सकती है।
इसके लिए उसे 7 दिन के अंदर पोर्टल पर बताना होता है और पहले अवार्ड की पूरी रकम जमा करनी होती है।
यह नियम आपके लिए राहत है।
चुनौती देने से पहले ही पैसा जमा हो जाता है, इसलिए सिर्फ वक्त खींचने के लिए चुनौती देना आसान नहीं रहता।
अवार्ड और पेमेंट के बीच में अगर आप फंसे महसूस करें, तो हर तारीख और पोर्टल का हर नोटिस सेव रखिए।
यही आपके अगले कदम का सबूत बनेगा।
SMART ODR में शिकायत की फीस कितनी लगती है?
फीस का सवाल सबसे पहले दिमाग में आता है, और यहां अच्छी खबर है। रजिस्ट्रेशन और प्री कंसिलिएशन फ्री हैं।
कंसिलिएशन की फीस निवेशक नहीं, कंपनी भरती है।
सफल कंसिलिएशन पर ₹4,800 और असफल होने पर ₹3,240 लगते हैं, और कंपनी यह खर्च आपसे नहीं वसूल सकती।
एक छोटा नियम याद रखिए।
अगर आप विवाद होने के छह महीने बाद कंसिलिएशन शुरू करते हैं, तो शुरू करने वाले पक्ष को ₹1,000 की लेट फीस देनी पड़ती है।
असली खर्च आर्बिट्रेशन में आता है, और यह दोनों पक्ष भरते हैं।
क्लेम की रकम के हिसाब से हर पक्ष की फीस ऐसी है।
- ₹1 लाख तक के क्लेम पर ₹5,400
- ₹1 लाख से ₹10 लाख तक ₹9,000
- ₹10 लाख से ₹20 लाख तक ₹13,500
- ₹20 लाख से ₹30 लाख तक ₹18,000
- ₹30 लाख से ₹50 लाख तक ₹67,500
- ₹50 लाख से ₹1 करोड़ तक ₹1,35,000
जो पक्ष केस जीतता है, उसकी जमा की हुई फीस अवार्ड के हिसाब से वापस मिलती है।
इसलिए फीस को खर्च नहीं, अस्थायी जमा की तरह देखिए।
एक चेतावनी भी है। कंसिलिएशन फेल होने के एक महीने बाद आर्बिट्रेशन शुरू करेंगे तो फीस दोगुनी हो जाती है, इसलिए फैसला लेने में देर मत कीजिए।
SMART ODR में शिकायत खारिज या अटक क्यों जाती है?
SMART ODR par complaint kaise kare, यह जानने के बाद भी शिकायत अधूरी जानकारी, पात्रता से जुड़ी समस्या या कमजोर दस्तावेज़ों के कारण अटक सकती है
नीचे वे कारण हैं जो ज़्यादातर मामलों में दिखते हैं।
अपनी शिकायत जमा करने से पहले इन्हें एक बार मिला लीजिए।
- मामला पहले से कहीं और चल रहा है। कोर्ट, कंज्यूमर फोरम या किसी आर्बिट्रेशन में वही विवाद लंबित हो, तो ODR उसे नहीं लेता।
- पहले कंपनी से बात नहीं की। सेबी का पहला नियम है कि निवेशक पहले उसी कंपनी तक जाए, इसलिए बिना लिखित शिकायत के सीधे ODR पर जाना कमज़ोर पड़ता है।
- सबूत अधूरे या धुंधले हैं। कटे हुए स्क्रीनशॉट और बिना तारीख के कागज़ से कंसिलिएटर को आपकी बात समझने में मुश्किल होती है।
- रकम या तारीख मेल नहीं खाती। शिकायत में लिखी रकम और अटैच स्टेटमेंट अलग निकले तो मामला उलझ जाता है।
अगर शिकायत अटकी हुई लगे, तो घबराकर नई शिकायत मत डालिए।
पहले पोर्टल का स्टेटस और नोटिस देखिए, फिर लिखित में पूछिए कि क्या कमी है।
एक ही विवाद पर कई बार शिकायत डालना आपका केस मज़बूत नहीं करता।
इससे रिकॉर्ड में उलझन बनती है और कंपनी को सवाल उठाने का मौका मिलता है।
SMART ODR और NSE BSE की आर्बिट्रेशन में क्या फर्क है?
कई निवेशक पूछते हैं कि एक्सचेंज में अलग से जाना है या ODR काफी है।
दोनों रास्ते जुड़े हुए हैं, पर उनकी शुरुआत अलग जगह से होती है।
ब्रोकर NSE या BSE का सदस्य हो, तो एक्सचेंज की अपनी शिकायत व्यवस्था भी है।
दोनों एक्सचेंज की साइट पर शिकायत का तरीका SMART ODR की तरफ भी इशारा करता है।
अगर आपका ब्रोकर NSE का सदस्य है, तो एक्सचेंज की शिकायत व्यवस्था और आगे का रास्ता एनएसई में शिकायत कैसे करें में कदम दर कदम मिलता है।
फर्क इतना है कि एक्सचेंज की व्यवस्था उसके अपने सदस्यों तक सीमित है।
ODR का दायरा बड़ा है, क्योंकि इसमें ब्रोकर के साथ एडवाइजर, फंड कंपनी और पोर्टफोलियो मैनेजर भी आते हैं।
BSE के सदस्य ब्रोकर के मामले में भी वही क्रम चलता है, पहले ब्रोकर, फिर एक्सचेंज का शिकायत ढांचा और उसके बाद ODR।
बारीकियां बीएसई में शिकायत कैसे करें में अलग से लिखी हैं।
फैसला करते वक्त एक सीधा सवाल पूछिए कि आपके विवाद की रकम कितनी है और कंपनी किस श्रेणी की है।
रकम ₹1 लाख से कम हो तो आर्बिट्रेशन कागज़ों पर ही निपट जाता है, और बड़ी रकम में सही चरण चुनना ज़्यादा मायने रखता है।
SMART ODR में शिकायत से पहले क्या करें और क्या नहीं?
SMART ODR me complaint kaise karen, यह समझना और शिकायत डालना आसान है, पर उसे सही तरीके से डालना असली काम है।
नीचे वे आदतें हैं जो ODR में आपके केस को मज़बूत रखती हैं।
इन्हें एक चेकलिस्ट की तरह इस्तेमाल कीजिए। हर बात सीधे पोर्टल के नियमों से जुड़ी है।
- हर तारीख लिखकर रखें। कंपनी का जवाब कब आया, SCORES पर कब गए, ODR कब डाला, सब एक जगह लिखिए, क्योंकि समयसीमा की गिनती इन्हीं तारीखों से होती है।
- भावनाओं की जगह तथ्य लिखें। “ब्रोकर ने मुझे धोखा दिया” की जगह “15 मार्च को मेरी मंजूरी के बिना ₹80,000 का ट्रेड हुआ” लिखिए।
- किसी पर आरोप मत लगाइए। सिर्फ वह लिखिए जो आपके कागज़ दिखाते हैं।
- कंसिलिएशन से पहले अपनी कम से कम मांग तय करें। आप पूरा पैसा चाहते हैं या आंशिक समझौता मंज़ूर है, यह पहले से सोच लें।
सबसे आखिर में एक बात। ODR का हर चरण ऑनलाइन है, इसलिए मोबाइल नंबर और ईमेल चालू रखिए, क्योंकि नोटिस और अगली तारीख वहीं आती है।
निष्कर्ष
SMART ODR में शिकायत कैसे करें, इसका सीधा जवाब है कि पहले कंपनी, फिर SCORES, और उसके बाद smartodr.in पर पूरी तैयारी के साथ जाइए।
रजिस्ट्रेशन और प्री कंसिलिएशन फ्री हैं, इसलिए शुरू करने में डर की कोई वजह नहीं।
असली सावधानी SCORES और ODR के क्रम में है। गलत क्रम में दूसरा कदम उठाने से पहला रास्ता बंद हो जाता है।
इसलिए अपना फोल्डर बनाइए, तारीखें लिखिए और शिकायत में सिर्फ तथ्य रखिए।
फिर 21 दिन की घड़ी शुरू होते ही हर नोटिस पर नज़र रखिए।
आपके पास पूरा नक्शा है। अब बस सही चरण पर, सही सबूत के साथ कदम रखना है।
Report. Recover. Stay Fraud Free.
SMART ODR में शिकायत दर्ज करने में सहायता पाएं
Frequently Asked Questions
smartodr.in पर उसी PAN, ईमेल और मोबाइल से लॉगिन कीजिए जिससे आपने रजिस्टर किया था। डैशबोर्ड में शिकायत का चरण और अगली तारीख दिखती है। नोटिस आपके रजिस्टर्ड ईमेल पर भी आते हैं, इसलिए उन्हें डिलीट मत कीजिए।
हां, बाजार की कंपनी भी ODR शुरू कर सकती है, पर उसे निवेशक को कम से कम 15 कैलेंडर दिन का नोटिस देना पड़ता है। ऐसा नोटिस मिले तो उसे नजरअंदाज मत कीजिए और अपने सबूत संभालकर जवाब तैयार रखिए।
नहीं, पूरी प्रक्रिया पोर्टल पर ऑनलाइन चलती है। आप घर बैठे शिकायत डालते हैं, सबूत अपलोड करते हैं और कंसिलिएशन या आर्बिट्रेशन की कार्यवाही में हिस्सा लेते हैं। बस मोबाइल, ईमेल और इंटरनेट चालू रखिए।
हां। ₹1,00,000 या उससे कम के क्लेम में आर्बिट्रेशन का फैसला सिर्फ कागज़ों के आधार पर होता है, यानी बहस की सुनवाई नहीं होती। इसलिए ऐसे छोटे क्लेम में आपके दस्तावेज़ ही आपकी पूरी दलील होते हैं।
शिकायत लिमिटेशन कानून के दायरे में डालनी होती है, जो विवाद उठने की तारीख या आखिरी लेनदेन की तारीख से तीन साल है। जो तारीख बाद की हो वही गिनी जाती है, इसलिए देरी होने पर शिकायत लंबी चलने का जोखिम बढ़ता है।

