Quick Summary
INH वह रजिस्ट्रेशन कोड है जो SEBI रिसर्च एनालिस्ट को देता है। INH नंबर से रिसर्च एनालिस्ट की जांच आप SEBI की अपनी वेबसाइट पर करें, एनालिस्ट के भेजे लिंक या स्क्रीनशॉट पर नहीं। नंबर चालू होना चाहिए, नाम इनवॉइस से मिलना चाहिए और फीस एक परिवार के लिए साल में ₹1,51,000 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 4 अगस्त 2026 को SEBI ने एक ही आदेश में 17 रिसर्च एनालिस्ट के रजिस्ट्रेशन रद्द किए, इसलिए पुराना सर्टिफिकेट कुछ साबित नहीं करता।
फोन पर आवाज बहुत भरोसे वाली थी।
उन्होंने खुद को “SEBI रजिस्टर्ड एनालिस्ट” बताया, INH से शुरू होने वाला लंबा नंबर बोला और हर हफ्ते “पक्के टारगेट” वाली कॉल का वादा किया।
नंबर सुनने में सरकारी लगता है, पर असली सवाल दूसरा है।
क्या यह नंबर आज SEBI की लिस्ट में है, और क्या यह उसी इंसान का है जो आपसे पैसे मांग रहा है।
INH नंबर से रिसर्च एनालिस्ट की जांच में बस तीन मिनट लगते हैं।
INH Number Se Research Analyst Ki Jaanch Kaise Karen?
SEBI की वेबसाइट खोलिए और Intermediaries सेक्शन में Recognised Intermediaries पर जाइए।
श्रेणी की सूची से Research Analyst चुनिए और नाम या रजिस्ट्रेशन नंबर से खोजिए।

यह खोज अपने फोन या लैपटॉप पर खुद कीजिए। एनालिस्ट जो लिंक, QR कोड या स्क्रीनशॉट भेजे, उसका इस्तेमाल मत कीजिए।
रिकॉर्ड खुलने पर तीन बातें मिलाइए:
- INH नंबर वही है। हर अंक वही होना चाहिए जो एनालिस्ट ने आपको बताया।
- नाम वही है। रजिस्टर्ड नाम वही हो जो पेमेंट पेज, एग्रीमेंट और इनवॉइस पर है।
- रजिस्ट्रेशन चालू है। रिकॉर्ड में रद्द, निलंबित या खत्म हो चुका स्टेटस नहीं दिखना चाहिए।
तीनों बातें मिल जाएं तो पक्का हो गया कि सामने वाला एक असली रजिस्टर्ड संस्था है।
यह पहला पड़ाव है, आखिरी नहीं। इससे यह तय नहीं होता कि सलाह अच्छी है या फीस सही है।
INH Number का मतलब क्या होता है?
INH वह शुरुआती अक्षर हैं जो SEBI रिसर्च एनालिस्ट को देता है।
इन्वेस्टमेंट एडवाइजर का कोड अलग होता है और वह INA से शुरू होता है।
पहले तीन अक्षर बताते हैं कि सामने वाला किस नियम के तहत काम करता है।
“खरीदो, बेचो” वाली कॉल देने वाला आम तौर पर रिसर्च एनालिस्ट होता है, इसलिए नंबर INH से शुरू होना चाहिए।
नंबर के बाकी अंक सिर्फ पहचान हैं।
छोटा नंबर होने का मतलब पुराना या बेहतर एनालिस्ट नहीं है, और बड़ा नंबर होने का मतलब कमजोर एनालिस्ट नहीं है।
क्या रजिस्ट्रेशन खत्म होने के बाद भी INH नंबर दिखाया जा सकता है?
हां, और यहीं कई निवेशक धोखा खाते हैं। वेबसाइट पर लगी सर्टिफिकेट की फोटो अपने आप नहीं बदलती।
एनालिस्ट उसे सालों तक दिखाता रह सकता है।
रिसर्च एनालिस्ट का रजिस्ट्रेशन पांच साल चलता है।
नवीनीकरण की फीस मौजूदा अवधि खत्म होने से पहले के तीन महीनों में भरनी होती है।
4 अगस्त 2026 को SEBI ने 17 रिसर्च एनालिस्ट के सर्टिफिकेट रद्द कर दिए, क्योंकि उन्होंने यह फीस नहीं भरी थी।
इनमें से कुछ के रजिस्ट्रेशन 2020 में ही खत्म हो चुके थे।

यह आदेश BSE को भेजा गया, जो रिसर्च एनालिस्ट के लिए प्रशासन और निगरानी करने वाली संस्था के रूप में काम करता है।
SEBI का मकसद था कि “अब लागू नहीं” सर्टिफिकेट से निवेशकों को गुमराह न किया जाए।
अगर किसी research analyst ka SEBI registration cancel ho gaya तो यह समझना भी ज़रूरी है कि cancellation के बाद refund और complaint के लिए कौन से रास्ते उपलब्ध हैं।
इसीलिए हर बार पैसे देने के दिन लाइव रिकॉर्ड देखिए, सिर्फ एक बार नहीं।
नंबर के अलावा और क्या मिलाना चाहिए?
नंबर सही निकलने के बाद बाकी रिकॉर्ड को एनालिस्ट की बातों से मिलाइए।
असली रजिस्ट्रेशन छोटी बातों में भी मेल खाता है।
पहले रजिस्टर्ड नाम और रजिस्ट्रेशन का प्रकार देखिए।
कंपनी के नाम से रजिस्ट्रेशन हो तो पैसा किसी व्यक्ति के निजी खाते में नहीं जाना चाहिए।
फिर SEBI रिकॉर्ड का ईमेल और फोन नंबर उस नंबर से मिलाइए जिससे एनालिस्ट आपसे बात करता है।
अलग विवरण अपने आप गड़बड़ी का सबूत नहीं है, पर लिखित सवाल पूछने की वजह जरूर है।
एनालिस्ट की वेबसाइट के नीचे और रिसर्च रिपोर्ट के पहले पन्ने पर रजिस्ट्रेशन की जानकारी और डिस्क्लेमर होना चाहिए। न मिले तो लिखकर पूछिए।
पेमेंट वाला खाता आखिर में देखिए। पैसा रजिस्टर्ड संस्था के नाम वाले खाते में ही जाना चाहिए।
अगर कोई “पार्टनर” का खाता या निजी UPI मांगे तो रुक जाइए।
Research Analyst Ki Fees Limit Kya Hai?
सही INH नंबर होने से ऊंची फीस जायज नहीं हो जाती।
SEBI ने व्यक्ति और HUF ग्राहकों के लिए सीमा तय की है: एक परिवार के लिए साल में ₹1,51,000।
यह सीमा संस्थागत और मान्यता प्राप्त निवेशकों पर लागू नहीं होती।
अगर एनालिस्ट कहे कि आप “मान्यता प्राप्त” हैं, तो औपचारिक दस्तावेज मांगिए।
साल भर में दिए गए सारे पैसे जोड़िए। “प्रीमियम”, “VIP” या “अपग्रेड” नाम के प्लान भी उसी कुल राशि में गिने जाते हैं।
एडवांस फीस एक तिमाही से ज्यादा नहीं ली जा सकती। सेवा बीच में बंद हो तो बिना इस्तेमाल हुआ हिस्सा अनुपात में लौटाना होता है।
INH Number SEBI Ki List Me Nahi Hai: क्या करें?
पैसे मत दीजिए और बहस भी मत कीजिए।
खोज का तारीख वाला स्क्रीनशॉट लीजिए और वह मैसेज सहेज लीजिए जिसमें नंबर बताया गया था।
ये दोनों आपके सबूत हैं।
एनालिस्ट से रजिस्टर्ड नाम और नंबर लिखकर मांगिए और दोबारा खोजिए।
ब्रांड नाम और कंपनी के नाम में फर्क या एक अंक की गलती सबसे आम निर्दोष वजहें हैं।
फिर भी लाइव रिकॉर्ड न मिले तो उसे बिना रजिस्ट्रेशन वाला मानिए।
बिना रजिस्ट्रेशन किसी को पैसे लेकर निवेश की सलाह देने की इजाजत नहीं है।
अगर आप पैसे दे चुके हैं तो पेमेंट का सबूत, चैट और स्क्रीनशॉट एक फोल्डर में रखिए।
शिकायत की शुरुआत इन्हीं से होती है।
क्या आपने ऐसे एनालिस्ट को पैसे दिए हैं जो SEBI की लिस्ट में मिल ही नहीं रहा?
पेमेंट का सबूत और चैट हमें भेजिए, हमारी टीम दस्तावेज देखकर बताएगी कि आपके मामले में कौन सा शिकायत रास्ता ठीक रहेगा। मुफ्त सलाह के लिए हमसे रजिस्टर करें.
क्या कोई असली एनालिस्ट का नंबर इस्तेमाल करके खुद को रजिस्टर्ड बता सकता है?
हां, और यह सावधान लोगों को भी उलझा देता है।
कुछ लोग किसी असली एनालिस्ट का INH नंबर बोलते हैं, इसलिए आपकी खोज में साफ और चालू रिकॉर्ड दिखता है।
नंबर असली है, पर फोन पर बात करने वाला उस एनालिस्ट का आदमी न भी हो।
रिकॉर्ड सिर्फ यह साबित करता है कि नंबर मौजूद है, यह नहीं कि बोलने वाला उसका मालिक है।
इस खाई को एक कदम से बंद कीजिए।
सिर्फ INH नंबर देखकर भरोसा करने के बजाय SEBI registration number check kaise kare जानना ज़्यादा ज़रूरी है।
SEBI रिकॉर्ड में दिए संपर्क विवरण से रजिस्टर्ड संस्था तक खुद पहुंचिए, उस नंबर से नहीं जिससे आपको कॉल आई।
फिर लिखित में पूछिए कि क्या आपसे संपर्क करने वाला व्यक्ति उनके साथ काम करता है।
असली संस्था एक या दो दिन में लिखकर जवाब देगी।
पेमेंट पेज भी देखिए। नंबर कंपनी A का हो और UPI या बैंक खाता किसी और के नाम पर हो, तो असली गड़बड़ी वहीं पकड़ में आती है।
क्या वैध INH नंबर का मतलब है कि सलाह अच्छी और सुरक्षित है?
नहीं। रजिस्ट्रेशन बस इतना बताता है कि SEBI ने संस्था को मान्यता दी है और संस्था को SEBI के नियम मानने हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि कॉल से मुनाफा होगा।
रजिस्टर्ड एनालिस्ट भी नियम तोड़ सकता है। SEBI ने रजिस्टर्ड संस्थाओं पर भ्रामक दावों और जोखिम की जानकारी न देने जैसे मामलों में कार्रवाई की है।
हर कार्रवाई सार्वजनिक आदेश में दर्ज होती है।
किसी फर्म के बारे में पढ़ते समय अफवाह या ग्रुप के स्क्रीनशॉट पर नहीं, आदेश के असली पाठ पर भरोसा कीजिए।
तीन आदतें हर हाल में काम आती हैं। पैसे देने से पहले साइन किया हुआ एग्रीमेंट और जोखिम प्रोफाइल मांगिए।
एनालिस्ट की अपनी वेबसाइट पर मासिक शिकायत डेटा देखिए और लिख लीजिए कि वह मौजूद है, गायब है या पुराना है।
और पक्के या तय रिटर्न का कोई भी वादा मत मानिए। कोई रजिस्टर्ड एनालिस्ट ऐसा वादा नहीं कर सकता।
Registered Research Analyst Ki Complaint Kaise Karen?
सबसे पहले एनालिस्ट के शिकायत संपर्क को लिखित में शिकायत भेजिए और उसकी कॉपी रखिए।
जवाब से संतुष्टि न मिले तो अगला पड़ाव SEBI की शिकायत प्रणाली है।
पूरी प्रक्रिया अलग गाइड में है, इसलिए यहां चरण दोहराए नहीं जा रहे।
हमारी गाइड investment advisor ki shikayat kaise kare में जरूरी दस्तावेजों की सूची मिलेगी।
शिकायत में रजिस्टर्ड नाम, INH नंबर और तारीख वाला पेमेंट रिकॉर्ड जरूर लगाइए।
यही तीन चीजें आपकी शिकायत को मजबूत बनाती हैं।
अपनी एक समयरेखा भी बनाइए: कब पैसे दिए, कब एनालिस्ट को लिखा और कब जवाब आया।
इन तारीखों से तय होता है कि आप अगले चरण पर कब जा सकते हैं।
INH Jaanch को आदत कैसे बनाएं?
इस जांच को पैसे देने से पहले की तीन मिनट की आदत बना लीजिए।
लाइव रिकॉर्ड खोजिए, नाम मिलाइए, पेमेंट खाता मिलाइए, फीस को ₹1,51,000 की सीमा से तौलिए और स्क्रीनशॉट रखिए।
यही आदत ज्यादातर परेशानियों को शुरू होने से पहले रोक देती है।
नवीनीकरण के समय भी जांच दोहराइए। आपका सब्सक्रिप्शन चलता रहता है, पर रजिस्ट्रेशन बदल सकता है।
जनवरी में चालू रिकॉर्ड अक्टूबर में अलग दिख सकता है।
अगर कुछ भी खटके तो रुक जाइए। असली एनालिस्ट आपके एक दिन सोचने पर बुरा नहीं मानेगा।
जो “सिर्फ आज की ऑफर” कहकर जल्दी मचाए, उसने अपने बारे में काफी कुछ बता दिया है।
निष्कर्ष
INH नंबर तभी काम का है जब आप उसे उसी दिन SEBI की अपनी लिस्ट पर जांचें जिस दिन पैसा दे रहे हैं और नाम इनवॉइस से मेल खाए।
वेबसाइट या सर्टिफिकेट की फोटो पर लिखा नंबर रजिस्ट्रेशन खत्म होने के सालों बाद भी दिखता रह सकता है, जैसा अगस्त 2026 के आदेश ने दिखाया।
तीनों जांचें कीजिए और फीस को ₹1,51,000 की सीमा से मिलाइए।
तारीख वाले स्क्रीनशॉट और पेमेंट का रिकॉर्ड संभालकर रखिए, क्योंकि आपकी शिकायत की मजबूती इन्हीं से तय होती है।
अगर रिकॉर्ड मेल न खाए, या आप पहले ही ऐसे व्यक्ति को पैसे दे चुके हैं जो जांच में खरा नहीं उतरा, तो अपने दस्तावेज संभालकर रखिए और जल्दी मदद मांगिए।
Report. Recover. Stay Fraud Free.
Frequently Asked Questions
SEBI की वेबसाइट पर Intermediaries सेक्शन में Recognised Intermediaries खोलें और Research Analyst चुनें। नाम या Registration Number से खुद खोजें। एनालिस्ट के भेजे लिंक, सर्टिफिकेट या स्क्रीनशॉट पर भरोसा न करें।
INH, Research Analyst का रजिस्ट्रेशन कोड है, जबकि INA, Investment Adviser के लिए इस्तेमाल होता है। दोनों के नियम अलग हैं, इसलिए फीस और शिकायत से जुड़े नियम भी अलग होते हैं। दी जा रही सेवा के अनुसार सही कोड की जाँच करें।
हाँ। सर्टिफिकेट या वेबसाइट पर लगा बैनर अपने आप अपडेट नहीं होता। अगस्त 2026 में SEBI ने नवीनीकरण शुल्क जमा न करने पर 17 Research Analysts के रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिए थे। इसलिए पैसे देने से पहले मौजूदा रिकॉर्ड की जाँच करें।
पैसे न दें। SEBI के रिकॉर्ड का तारीख सहित स्क्रीनशॉट लें और वह मैसेज सुरक्षित रखें जिसमें नंबर दिया गया था। रजिस्टर्ड नाम और पैसे लेने वाले खाते के नाम में अंतर एक गंभीर चेतावनी है, जिसकी पुष्टि करना ज़रूरी है।
नहीं। कोई रजिस्टर्ड Research Analyst निवेश पर पक्के मुनाफ़े की गारंटी नहीं दे सकता। रजिस्ट्रेशन का मतलब यह भी नहीं है कि SEBI सलाह की गुणवत्ता या निवेश के नतीजों की गारंटी देता है। अगर कोई पक्के मुनाफ़े का वादा करे, तो उस मैसेज को सबूत के तौर पर सुरक्षित रखें।





