Quick Summary
SEBI के नियमों में research analyst की हदें साफ लिखी हैं। हर recommendation के पीछे written research report होनी चाहिए। Client के capital के हिसाब से lot size या quantity बताना personalised advice है, जो RA के scope से बाहर है। Risk और stop loss बताए बिना trade देना disclosure नियमों के खिलाफ है। Agreement sign होने से पहले fees लेना procedural violation है। और client का portfolio manage करना तो पूरी तरह अलग licence का काम है। इनमें से हर एक चीज़ SCORES complaint का आधार बन सकती है।
ज़्यादातर investors को SEBI complaint का ख्याल तब आता है जब पैसा डूब चुका होता है। और तब भी मन में एक ही सवाल घूमता रहता है।
“जो मेरे साथ हुआ, क्या वो सच में गलत था? या market है, ऐसा तो होता ही है?”
इसी उलझन का फायदा advisory वाले उठाते हैं। वो जानते हैं कि आपको नियम पता ही नहीं हैं। तो आज नियम जान लीजिए।
नीचे हर वो चीज़ लिखी है जो SEBI registered research analyst कर ही नहीं सकता। अगर इनमें से कुछ भी आपके साथ हुआ है, तो वो market नहीं था। वो violation था।
Research Analyst की Scope कहाँ तक जाती है?
हर registered entity की तरह research analyst भी एक तय दायरे में बँधा होता है, मन-मर्ज़ी से service देने की छूट उसे नहीं है।
SEBI के नियम बताते हैं कि उसकी service कहाँ से शुरू होती है और कहाँ जाकर रुक जाती है।
इसी सीमा को पार करना ही ज़्यादातर violations की जड़ है, चाहे वो जानबूझकर हो या “help” के नाम पर।
यही सीमाएँ अब एक-एक करके समझिए, पहले नियम से शुरुआत करते हैं।
नियम 1: हर call के पीछे written research report होनी चाहिए
आपको सिर्फ WhatsApp पर “ABC stock buy karo, target 250” आता था? कोई report कभी नहीं मिली?
SEBI के हिसाब से research analyst जो भी recommendation देता है, उसका आधार एक research report होता है। Report में company का analysis, recommendation की वजह और risk लिखा होता है।
सिर्फ call पर या chat पर tips देना, बिना किसी report के, नियम के खिलाफ है। और आपके लिए अच्छी बात ये है कि report ना मिलना साबित करना बहुत आसान है। आपकी chat history ही proof है।
नियम 2: Lot size और quantity बताना RA का काम नहीं है
“Sir आपके 2 lakh हैं ना, तो Bank Nifty के 3 lot लो।”
ये सुनने में personal service लगती है। असल में ये line ही violation है।
Research analyst सबके लिए एक जैसी research देता है। आपके capital के हिसाब से कितने lot लेने हैं, ये बताना personalised investment advice है। उसके लिए अलग registration चाहिए, investment adviser का।
जो RA आपसे आपका capital पूछकर quantity बता रहा था, वो अपनी हद से बाहर जा रहा था। और अगर उन्हीं lot sizes से आपका loss बड़ा हुआ, तो ये बात आपकी complaint में वज़न रखती है।
नियम 3: Stop loss और risk बताए बिना trade देना
Loss वाले दिन आपने पूछा होगा, “sir stop loss kya rakhna tha?” और जवाब मिला होगा “hold karo, recover ho jayega.”
SEBI के disclosure नियम कहते हैं कि recommendation के साथ risk बताना ज़रूरी है। Trade में क्या risk है, कितना जा सकता है, ये छुपाकर सिर्फ target बताना अधूरी और गलत service है।
जिस advisory ने आपको सिर्फ सपने बताए और खतरा कभी नहीं बताया, उसने नियम तोड़ा है।
नियम 4: Agreement से पहले fees लेना
याद कीजिए। पहले payment हुआ था या पहले agreement sign हुआ था?
ज़्यादातर लोगों का जवाब होता है कि agreement तो कभी आया ही नहीं। सिर्फ payment link आया था।
SEBI का process उल्टा है। पहले client के साथ terms तय होते हैं, agreement होता है, फिर fees लगती है। जो advisory बिना agreement के पैसे ले रही थी, वो पहले दिन से ही procedure के बाहर काम कर रही थी।
Invoice ना मिलने की परेशानी अलग से एक पूरा मुद्दा है, उस पर detail में यहाँ पढ़िए: research analyst ne invoice nahi diya।
नियम 5: Demo calls के नाम पर live tips
“Demo period” या “trial calls” के नाम पर जो चल रहा होता है, वो असल में बिना agreement, बिना risk profiling के live recommendations होती हैं।
RA का काम structured research देना है, demo के नाम पर casual tips बाँटना नहीं। Demo में हुआ loss भी loss ही है, और उसके पीछे भी वही जवाबदेही बनती है।
Trial वाले पूरे खेल की परतें अलग blog में खोली हैं: stock advisory free trial ke baad paise maang rahe।
नियम 6: आपका portfolio manage करना
“आप कुछ मत करो sir, अपना portfolio हमें बता दो, हम सब सँभाल लेंगे।”
ये सबसे खतरनाक line है। Portfolio manage करने के लिए portfolio manager का licence चाहिए, जिसकी शर्तें बहुत सख्त हैं। Research analyst के पास ये licence नहीं होता।
जो RA आपका पूरा portfolio चलाने की बात कर रहा है, वो एक ऐसा काम कर रहा है जिसकी उसे अनुमति ही नहीं है। इसी से जुड़ा एक और खेल broker referral का है, जिस पर पूरा अलग blog है: advisory ke bataye broker ke saath account khole ya nahi।
RA ने कोई Rule तोड़ा? अब आगे क्या
ऊपर के नियम पढ़ते हुए अगर आपके मन में बार बार यही चल रहा था कि “ये तो मेरे साथ हुआ है,” तो एक बात साफ समझ लीजिए।
आपके साथ जो हुआ वो बदकिस्मती नहीं थी। वो एक registered entity का नियम तोड़ना था। और नियम टूटने पर complaint बनती है, चाहे loss हुआ हो या refund फँसा हो।
कौन सा violation आपके case में सबसे मजबूत है और उसे complaint में कैसे लिखा जाए, यही तय करना सबसे अहम step है। यहीं ज़्यादातर लोग अकेले गलती करते हैं।
अपने case के violations की सही पहचान के लिए हमारी team की सहायता लीजिए। Documents देखकर साफ़ बताया जाएगा कि आपकी complaint किस नियम पर टिकेगी। यहाँ register करें।
Violation पहचानना एक बात है, उसे सही तरीके से complaint में ढालना बिल्कुल अलग काम है। गलत category या अधूरी जानकारी की वजह से कई मजबूत cases भी कमज़ोर पड़ जाते हैं। यही वजह है कि हमारी team सिर्फ़ violations पहचानने में नहीं, complaint file करने में भी पूरा साथ देती है।
Violations से लेकर complaint filing तक, पूरा process यहाँ पढ़िए: research analyst ne nuksan kiya
आपका case अकेले नहीं, सही सहारे के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
निष्कर्ष
Research analyst की हदें SEBI के नियमों में साफ़ लिखी हैं, report देना, risk बताना, agreement के बाद ही fees लेना, और सिर्फ़ research तक सीमित रहना।
इनमें से कोई भी हद टूटे, तो वो बदकिस्मती नहीं, सीधा violation है।
आपकी chat history, payment records और trade history, यही तीनों आपके case का सबसे मज़बूत सबूत बनते हैं।
अपने records इकट्ठा कीजिए और आज ही सही दिशा में पहला कदम उठाइए।
Frequently Asked Questions
Call recording न हो तब भी payment record, chat में दिए गए targets और आपकी trade history मिलकर case बनाते हैं। Report का न होना ख़ुद में violation है, और उसका proof आपकी chat में ही है।
RA stock या index पर research देता है। Buy या sell की recommendation, उसकी वजह और risk। कितना पैसा लगाना है और कितने lot लेने हैं, ये decision client का होता है या SEBI registered investment adviser का।
ये सबसे common उलझन है। फ़र्क ये है कि violation service के तरीके में होता है, result में नहीं। बिना report के tips, बिना risk बताए trades, बिना agreement के fees। ये सब loss से पहले हो चुके थे। Loss ने बस इन्हें सामने ला दिया।





