Quick Summary
Pheonix Capital Research रक्षा शर्मा का ट्रेड नेम है, जो SEBI में रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट (INH000022446) हैं और जिनका पता उदयपुर, राजस्थान का है। एक क्लाइंट ने जून और जुलाई 2026 में ₹1,35,000 फीस दी, और उसी दौरान उसके F&O P&L में ₹5,30,216 का घाटा दर्ज हुआ। उसकी शिकायत में रिकॉर्डेड कॉल पर घाटा रिकवर करवाने की बात का आरोप है। फर्म के लिखित जवाब में एक महीने की अवधि बढ़ाई गई और कहा गया कि घाटे की रिकवरी की कोई गारंटी नहीं है।
हो सकता है आप अभी Pheonix Capital Research की ऑप्शन कॉल पर ट्रेड कर रहे हों और अकाउंट लाल निशान में जा रहा हो। या फिर आप पैसे देने से ठीक पहले रुककर जांच रहे हों।
दोनों सूरतों में एक असली केस को ठंडे दिमाग से देख लेना काम आता है।
हमने एक क्लाइंट के इनवॉइस, पेमेंट, P&L, WhatsApp चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और ईमेल पढ़े हैं।
उसकी पहचान यहां पूरी तरह गोपनीय है, और जहां फर्म का अपना पक्ष मौजूद है, वह भी साथ में रखा गया है।
Pheonix Capital Research Kya Hai in Hindi
शुरुआत फर्म की बुनियादी जानकारी से करते हैं, क्योंकि इसी से तय होता है कि ज़िम्मेदार कौन है और कौन से नियम लागू होते हैं।
Pheonix Capital Research एक प्रोप्राइटरशिप है, कंपनी नहीं। यानी इसके पीछे एक व्यक्ति है, और SEBI उसी को जवाबदेह मानता है।
SEBI के रिकॉर्ड में रक्षा शर्मा इस फर्म की प्रोप्राइटर के तौर पर दर्ज हैं।
इनवॉइस पर पता सविना मेन रोड, उदयपुर, राजस्थान 313002 लिखा है।
फर्म ऑप्शन ट्रेडिंग की कॉल देती है, और उसके अपने ईमेल के मुताबिक ये कॉल WhatsApp पर टारगेट और स्टॉप लॉस के साथ भेजी जाती हैं।
एक छोटी सी बात और। फर्म के कुछ ईमेल में नाम “Phoenix Capital Research” लिखा मिलता है, जबकि इनवॉइस और रजिस्ट्रेशन में “Pheonix” है।
हमारे देखे दस्तावेज़ों में दोनों एक ही फर्म हैं।
Pheonix Capital Research Real Hai Ya Fake in Hindi
यह सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाता है, और इसका जवाब किसी फर्जी ऐप वाले मामले से कहीं ज़्यादा साफ है।
Pheonix Capital Research असली फर्म है और SEBI में रिसर्च एनालिस्ट के रूप में रजिस्टर्ड है।
रजिस्ट्रेशन नंबर INH000022446 है, जिसे आप SEBI की वेबसाइट पर खुद जांच सकते हैं।

लेकिन “रजिस्टर्ड” का मतलब “जोखिम से मुक्त” नहीं होता।
इसका मतलब सिर्फ इतना है कि फर्म SEBI के नियमों से बंधी है और गड़बड़ होने पर आप उसकी शिकायत कर सकते हैं।
एक फर्क ज़रूर समझ लीजिए। रिसर्च एनालिस्ट रिसर्च और सिफारिशें देता है।
आपकी पूंजी और हालात देखकर पर्सनल सलाह देना इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र का काम है, जिसके लिए अलग रजिस्ट्रेशन लगता है।
SEBI के नियमों में रिसर्च एनालिस्ट क्या कर सकता है और क्या नहीं, इसकी पूरी लिस्ट हमारी research analyst kya kar sakta hai kya nahi वाली गाइड में है।
Pheonix Capital Research Ki Fees Kitni Hai?
ज़्यादातर विवाद फीस से ही शुरू होते हैं। इसलिए यहां पैकेज, इस क्लाइंट की दी हुई रकम और SEBI के फीस नियम, तीनों एक साथ देख लेते हैं।
फर्म के इनवॉइस तिमाही “Stock Option” पैकेज के हैं।
एक इनवॉइस में 2 जुलाई से 2 अक्टूबर 2026 की तिमाही के लिए ₹80,000 लिखा है, GST समेत।
हर इनवॉइस पर “Payment is Non-Refundable” छपा है, और विवाद के लिए उदयपुर की अदालत का ज़िक्र है।

अब इस क्लाइंट की फीस देखिए।
नीचे हर भुगतान तारीख के क्रम में है:
| तारीख | रकम | इनवॉइस |
|---|---|---|
| 18 जून 2026 | ₹11,500 | PCR116, तारीख 22 जून 2026 |
| 19 जून 2026 | ₹8,500 | PCR116, तारीख 22 जून 2026 |
| 1 जुलाई 2026 | ₹40,000 | MP/2627/JUL/0001 |
| 1 जुलाई 2026 | ₹40,000 | MP/2627/JUL/0001 |
| 9 जुलाई 2026 | ₹35,000 | MP/2627/JUL/0007 |
यानी करीब तीन हफ्तों में ₹1,35,000, सब UPI से फर्म के नाम वाले अकाउंट में।

पहली दो पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। ₹20,000 का भुगतान 18 और 19 जून को हुआ, जबकि उसका इनवॉइस 22 जून का है।
क्लाइंट का कहना है कि पैसे देने से पहले उसे लिखित शर्तें नहीं मिली थीं।
SEBI के नियम इस पर क्या कहते हैं, वह भी जान लीजिए।
- पहले शर्तें, फिर फीस। रिसर्च एनालिस्ट को फीस लेने से पहले नियम और शर्तें बतानी होती हैं और क्लाइंट की सहमति लेनी होती है।
- सालाना सीमा। व्यक्तिगत और HUF क्लाइंट के लिए फीस ₹1,51,000 प्रति परिवार प्रति साल तक सीमित है।
- “नॉन रिफंडेबल” आखिरी बात नहीं है। इनवॉइस की एक लाइन SEBI के नियमों से ऊपर नहीं हो सकती।
- जिन दिनों सर्विस नहीं मिली, उनके लिए अनुपात में रिफंड मांगना वाजिब है।
क्लाइंट का तर्क है कि तीन हफ्तों में लिए गए तीन पैकेज सालाना सीमा से कहीं ऊंची दर बनते हैं।
नॉन रिफंडेबल” इनवॉइस के बाद पैसा वापस मिल पाता है या नहीं, इसके तीन रास्ते हमने kya SEBI complaint se paise wapas milte hain वाली गाइड में समझाए हैं।
Pheonix Capital Research Reviews in Hindi: कॉल और WhatsApp पर क्लाइंट का अनुभव
स्टार रेटिंग से ज़्यादा काम की चीज़ होती है किसी का असली अनुभव। नीचे की हर बात क्लाइंट की अपनी रिकॉर्डिंग और चैट से ली गई है।
कॉल WhatsApp और फोन पर आती थीं, जिनमें स्ट्राइक, एंट्री प्राइस, टारगेट और स्टॉप लॉस लिखे होते थे। कितनी मात्रा लेनी है, यह भी बताया जाता था।
एक मैसेज में कहा गया कि रकम ₹1 लाख हो तो 35 से 40 लॉट रखिए।

क्लाइंट अक्सर जवाब में लिखता था कि बाहर कब निकलना है, यह कॉल करके बता दीजिए।
1. रिकॉर्डेड कॉल पर लॉस रिकवरी की बात
शुरुआती घाटे के बाद एक प्रतिनिधि ने रिकॉर्डेड कॉल पर समझाया कि आगे क्या होगा।
उसने कहा कि वह तीन महीने में घाटा रिकवर करवा सकता है, और नई पूंजी मिले तो दस दिन में भी।
एक पहले की कॉल में ₹25,000 की पूंजी पर कम से कम ₹5,000 मुनाफा निकलने की बात हुई।
टीम की पुरानी कॉल से एक दिन में ₹1,71,000 के मुनाफे का ज़िक्र भी आया।
दूसरा पहलू भी सुन लीजिए। उन्हीं रिकॉर्डिंग में प्रतिनिधि यह भी कहता है कि 100% मुनाफा कोई नहीं देता, घाटा भी होगा, और जो इसका उल्टा कहे वह हवा में बात कर रहा है।
WhatsApp पर एक और संपर्क ने लिखा कि रिकवरी के लिए “sure and safe levels” दिए जाएंगे।
एक प्रतिनिधि ने यह भी लिखा कि उसकी कॉल पर घाटा हुआ तो वह रिकवर करवा देगी।
2. आखिरी फंड और एवरेज करने की सलाह
यह हिस्सा हर ऑप्शन ट्रेडर को धीरे धीरे पढ़ना चाहिए।
एक ट्रेड पहले से घाटे में था, और क्लाइंट ने लिखा कि ₹64,000 उसका “आखिरी फंड” है।
थोड़ी देर बाद प्रतिनिधि ने कहा, “Current se average krlo sir.” फिर एक मैसेज आया कि बस थोड़ा भरोसा रखिए।
दिलचस्प बात यह है कि एक अलग रिकॉर्डेड कॉल में दूसरे प्रतिनिधि ने साफ कहा था कि एवरेजिंग कभी मत करना।
यानी एक ही फर्म से दो उल्टी सलाह मिलीं।
घाटे वाले ऑप्शन में आखिरी पैसे से एवरेज करना सबसे महंगी गलतियों में से एक है।
ऑप्शन की कीमत समय के साथ घटती है, इसलिए और पैसा डालने से जोखिम सिर्फ बढ़ता है।
3. 15 दिन जब कोई कॉल नहीं आई
क्लाइंट ने तारीख के हिसाब से अपना रिकॉर्ड रखा था।
उसके मुताबिक जून के आखिर से अगस्त के बीच 15 ट्रेडिंग दिन ऐसे रहे जब कोई कॉल नहीं आई, और उसके कई मैसेज का जवाब भी नहीं मिला।
फीस देने के बाद जवाब का इंतज़ार करना किसी भी क्लाइंट के लिए सबसे बेचैन करने वाला दौर होता है। ऐसे मोड़ पर ज़्यादातर लोग समझ नहीं पाते कि करें क्या।
अगर आपका भी research analyst payment ke baad jawab nahi de raha, तो और पैसा डालने से पहले सबूत, रजिस्ट्रेशन और कंप्लायंस ऑफिसर वाले तीन काम निपटा लीजिए।
Pheonix Capital Research Option Trading Loss: P&L स्टेटमेंट और कुल चार्ज का सच
बातों से ज़्यादा भरोसा आंकड़ों पर किया जा सकता है।
नीचे क्लाइंट के ब्रोकर की F&O रिपोर्ट के आंकड़े हैं, 17 जून से 14 अगस्त 2026 के।
| रिपोर्ट में क्या है | रकम |
|---|---|
| ऑप्शन में वास्तविक घाटा | ₹5,30,216.75 |
| कुल चार्ज (STT, एक्सचेंज चार्ज, ब्रोकरेज, GST आदि) | ₹1,60,032.58 |
| इनमें सिर्फ STT | ₹85,556 |
चार्ज वाली लाइन को हल्के में मत लीजिए।
घाटे के ऊपर ₹1.6 लाख सिर्फ चार्ज में गए, जो बताता है कि ट्रेडिंग बहुत बार और भारी मात्रा में हुई।
यह रिपोर्ट उस अवधि के पूरे F&O अकाउंट की है।
क्लाइंट का कहना है कि उसके ट्रेड फर्म की कॉल पर हुए, पहला ट्रेड मुनाफे में रहा, और उसके बाद बड़े घाटे आए।
उनमें एक दिन का करीब ₹1.67 लाख का घाटा भी शामिल है।
Pheonix Capital Research Response: क्लाइंट की शिकायत पर फर्म का आधिकारिक जवाब
हर शिकायत के दो पक्ष होते हैं, और यहां फर्म ने लिखित में जवाब दिया है। पूरा सिलसिला तारीख के साथ देखिए।
17 अगस्त 2026. क्लाइंट ने फर्म को औपचारिक शिकायत भेजी।
उसमें फीस, बिना कॉल वाले 15 दिन, अनसुने मैसेज और घाटे का ब्योरा था, और तीन कामकाजी दिनों में जवाब मांगा गया।
21 अगस्त 2026. फर्म ने जवाब में उसकी सर्विस एक महीने के लिए बढ़ाने की पुष्टि की।
साथ में लिखा कि अपडेट WhatsApp पर टारगेट और स्टॉप लॉस के साथ आएंगे, और ट्रेड उतने ही लॉट में करना है जितने बताए जाएं।
उसी ईमेल में यह लाइन भी है कि घाटे की रिकवरी की कोई गारंटी या आश्वासन नहीं दिया जाता।

24 अगस्त 2026. क्लाइंट ने मामला फर्म के कंप्लायंस ऑफिसर तक बढ़ाया, यह कहते हुए कि जवाब में उसके किसी सवाल को छुआ ही नहीं गया।
इसके बाद उसने SEBI के SMART ODR के लिए करीब ₹6.9 लाख का दावा तैयार किया है। नतीजा अभी सामने नहीं आया है।
क्या किसी रिसर्च फर्म को लाखों की फीस देने के बाद आपको जवाब की जगह बस सर्विस बढ़ाने का ऑफर मिला?
हम आपके इनवॉइस, पेमेंट, चैट और रिकॉर्डिंग को सही क्रम में लगाकर शिकायत उस मंच तक ले जाने में मदद करते हैं जो फैसला कर सकता है।
Pheonix Capital Research Ke Khilaf Complaint Kaise Kare?
अगर आपका अपना विवाद है, तो रास्ता तय है और हर SEBI-रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट के लिए एक जैसा है। पहले कागज़ जुटाइए, फिर इसी क्रम में चलिए।
सबसे पहले ये दस्तावेज़ एक फोल्डर में रख लीजिए:
- हर इनवॉइस, नंबर और तारीख के साथ।
- हर पेमेंट का प्रूफ, जिसमें तारीख, रकम और ट्रांज़ैक्शन ID दिखे।
- शर्तें या एग्रीमेंट, और वह तारीख जब आपको पहली बार मिला।
- WhatsApp चैट और कॉल रिकॉर्डिंग, हर प्रतिनिधि के साथ की।
- ब्रोकर का P&L और कॉन्ट्रैक्ट नोट, सर्विस वाली अवधि के।
- फर्म को भेजे ईमेल, और उन पर आए जवाब।
पहला कदम, फर्म को लिखिए। तारीख वाला ईमेल भेजिए जिसमें फीस, क्या गलत हुआ और आप क्या चाहते हैं, साफ लिखा हो।
जवाब के लिए एक समय सीमा दीजिए।
दूसरा कदम, SCORES पर शिकायत। फर्म का जवाब न आए या ठीक न लगे, तो SEBI के SCORES पोर्टल पर दस्तावेज़ों के साथ शिकायत दर्ज कीजिए।
SCORES पर अकाउंट बनाने और शिकायत डालने का तरीका हर मामले में एक जैसा रहता है। हमने उसे stock broker ki complaint kaise kare वाली गाइड में कदम दर कदम दिखाया है।
तीसरा कदम, SMART ODR. SCORES से बात न बने, तो विवाद SEBI के ऑनलाइन मंच SMART ODR पर ले जाइए।
वहां सुलह की प्रक्रिया निवेशकों के लिए मुफ्त है।
सीधे मामलों में सुलह 2 से 3 महीने में निपट सकती है, जबकि विवादित मामले 6 से 12 महीने तक खिंचते हैं।
देरी की ज़्यादातर वजह अधूरे कागज़ और कमज़ोर शिकायत होती है, इसलिए SEBI complaint me kitna time lagta hai, यह काफी हद तक आपकी तैयारी पर टिका है।
एक बात ईमानदारी से। फीस या घाटा वापस मिलने की कोई गारंटी नहीं होती।
मंच आपके दस्तावेज़ देखकर फैसला करता है, इसलिए सबूत जितने साफ होंगे, बात उतनी मज़बूत होगी।
Pheonix Capital Research से जुड़ने से पहले क्या जांचें
अगर आपने अभी पैसे नहीं दिए हैं, तो आप सबसे मज़बूत जगह पर खड़े हैं। ये छोटी जांचें बाद की बड़ी परेशानी बचा सकती हैं।
- SEBI की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन खुद देखिए और नाम व नंबर नोट कीजिए।
- पैसे देने से पहले लिखित शर्तें मांगिए, खासकर फीस और रिफंड वाला हिस्सा।
- कॉल रिकॉर्ड कीजिए और चैट संभालिए। ज़बानी बात बाद में साबित करना मुश्किल होता है।
- “लॉस रिकवर करवा देंगे” सुनते ही रुक जाइए। यही वह पल है जब लोग सबसे ज़्यादा पैसा लगाते हैं।
- लॉट साइज़ खुद तय कीजिए। आपकी पूंजी कितना झेल सकती है, यह आपसे बेहतर कोई नहीं जानता।
- सिर्फ P&L नहीं, चार्ज भी जोड़िए। बार बार की भारी ट्रेडिंग अकेले लाखों खा सकती है।
अस्वीकरण: यह लेख एक क्लाइंट द्वारा साझा किए गए दस्तावेज़ों पर आधारित है, जिनमें उसकी पहचान हटा दी गई है, और इसमें फर्म का लिखित जवाब भी शामिल है। यह सिर्फ आरोपों और रिकॉर्ड को बताता है, Pheonix Capital Research या रक्षा शर्मा के खिलाफ कोई निष्कर्ष नहीं देता, और लिखते समय विवाद का फैसला नहीं हुआ था।
निष्कर्ष
Pheonix Capital Research उदयपुर की एक SEBI रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट फर्म है, जिसे रक्षा शर्मा प्रोप्राइटर के तौर पर चलाती हैं और जो तिमाही ऑप्शन कॉल पैकेज बेचती है।
इस केस में क्लाइंट ने तीन हफ्तों में ₹1,35,000 फीस दी, कॉल पर रिकवरी की बातें सुनीं, आखिरी फंड से एवरेज किया, और उसके P&L में ₹5.3 लाख का घाटा दर्ज हुआ।
दूसरी तरफ फर्म लिखित में कहती है कि रिकवरी की कोई गारंटी नहीं है। इन दोनों बातों को तौलना अब SEBI के मंच का काम है।
आप भी ऐसी जगह खड़े हैं, तो हर कॉल और चैट संभालिए, फर्म को लिखिए, और ठीक जवाब न मिले तो SCORES और SMART ODR तक जाइए।
Report. Recover. Stay Fraud Free.
Frequently Asked Questions
यह रक्षा शर्मा का ट्रेड नेम है, जो उदयपुर में SEBI रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट (INH000022446) के रूप में काम करती हैं। फर्म तिमाही ऑप्शन ट्रेडिंग कॉल पैकेज बेचती है।
हां, रिसर्च एनालिस्ट के रूप में, नंबर INH000022446 के साथ। पैसे देने से पहले SEBI की वेबसाइट पर यह रिकॉर्ड खुद जांच लें।
कोई भी SEBI रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट मुनाफे या रिकवरी की गारंटी नहीं दे सकता। इस केस में फर्म का लिखित जवाब भी कहता है कि रिकवरी की कोई गारंटी नहीं है।
पहले फर्म को इनवॉइस और पेमेंट प्रूफ के साथ लिखित में मांग भेजें। हल न हो तो SCORES पर शिकायत करें और फिर SMART ODR पर जाएं। रिफंड की कोई गारंटी नहीं होती।
पहले फर्म के ग्रीवेंस या कंप्लायंस संपर्क पर ईमेल करें, फिर SEBI के SCORES पोर्टल पर, और ज़रूरत हो तो SMART ODR पर। सारे दस्तावेज़ तैयार रखें।





